डाउन सिंड्रोम पीड़ित बच्चों के विकास में न्यूरो रीजेनरेटिव ट्रीटमेंट थेरेपी है कारगर

दानिश उमरी, आगरा।  हाल-फिलहाल तक यही माना जाता था कि जन्म के दौरान मस्तिष्क को होनेवाली क्षति अपरिवर्तनीय होती है। हालांकि अब उभरते अनुसंधान के साथ हम यह जान गए हैं कि सेल थेरेपी का उपयोग कर क्षतिग्रस्त मस्तिष्क के ऊतकों की मरम्मत संभव है। फिर, आज भी भारत में बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने गर्भनाल रक्त बैंकों के माध्यम से अपने स्टेम कोशिकाओं को संरक्षित नहीं किया है। उन सभी रोगियों के लिए जिन्होंने न्यूरोलॉजिकल संबंधित विकारों के लिए एक नया इलाज खोजने की सारी उम्मीदें खो दी है, वयस्क स्टेम सेल थेरेपी इस तरह के मरीजों के लिए एक नई आशा प्रदान करता है।
न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट आगरा, मेरठ और आसपास के इलाकों में रहनेवाले न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के सभी मरीजों के लिए 21 सितंबर, 2019 को मेरठ में एक निःशुल्क कार्यशाला सह ओपीडी परामर्श शिविर का आयोजन कर रहा हैं। न्यूरोजेन को एहसास है कि स्पाइनल कॉर्ड इंजुरी, मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी, ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी इत्यादि विकारों से पीड़ित मरीजों को सिर्फ परामर्श के उद्देश्य से मुंबई तक की यात्रा करना काफी तकलीफदेह होता है, इसलिए मरीजों की सुविधा के लिए इस शिविर का आयोजन किया जा रहा है। असाध्य न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीड़ित मरीज इस निःशुल्क शिविर में परामर्श हेतु समय लेने के लिए पुष्कला से 09821529653/09920200400 पर संपर्क कर सकते हैं।
न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट के निदेशक, एलटीएमजी अस्पताल व एलटीएम मेडिकल कॉलेज, सायन के प्रोफेसर व न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक शर्मा ने कहा, ‘‘आटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता, मस्कयुलर डिट्रॉफी, रीढ़ की हड्डी में चोट, लकवा, ब्रेन स्ट्रोक, सेरेब्रेलर एटाक्सिया (अनुमस्तिष्क गतिभंग) और अन्य न्यूरोलॉजिकल (मस्तिष्क संबंधी) विकार जैसी स्थितियों में न्यूरो रीजेनरेटिव रिहैबिलिटेशन थेरेपी उपचार के नए विकल्प के तौर पर उभर रही है। इस उपचार में आण्विक संरचनात्मक और कार्यात्मक स्तर पर क्षतिग्रस्त तंत्रिका ऊतकों की मरम्मत करने की क्षमता है।
न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट की उपनिदेशक व चिकित्सकीय सेवाओं की प्रमुख डॉ. नंदिनी गोकुलचंद्रन ने कहा, ‘‘न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट में की जानेवाली न्यूरो रीजेनरेटिव रिहैबिलिटेशन थेरेपी (एनआरआरटी) एक बहुत ही सरल और सुरक्षित प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में एक सुई की मदद से मरीज के स्वयं के बोन मैरो (अस्थि मज्जा) से स्टेम सेल ली जाती हैं और प्रसंस्करण के बाद उसके स्पाइनल फ्लुइड (रीढ़ की हड्डी में तरल पदार्थ) में वापस इंजेक्ट की जाती हैं। चूंकि इन कोशिकाओं को मरीज के शरीर से ही लिया जाता है ऐसे में रिजेक्शन (अस्वीकृति), और साइड इफेक्ट (दुष्प्रभाव) का खतरा नहीं रहता है, जो एनआरआरटी को पूरी तरह एक सुरक्षित प्रक्रिया बनाता है।
डाउन सिंड्रोम भारत में हर साल पैदा होने वाले 23,000 से 29,000 बच्चों को प्रभावित करता है। शोधकर्ता इस बारे में सुनिश्चित नहीं हैं कि डाउन सिंड्रोम क्यों होता है, लेकिन मां की उम्र को इसका एक कारक माना जाता है। 35 वर्ष की उम्र के बाद किसी महिला से डाउन सिंड्रोम वाले बच्चे होने की संभावना हर साल बढ़ती जाती है -- 35 साल की उम्र में 350 में एक, तो 40 साल की उम्र में 100 में से एक, तो वहीं 45 साल की उम्र में 30 में से एक बच्चे में इस तरह का मामला सामने आने की संभावना रहती है। हालांकि यह घातक नहीं है, विकसित देशों में नहीं, लेकिन भारत में यह घातक है।
डाउन सिंड्रोम गुणसूत्रों में दोष के कारण उत्पन्न होने वाली वंशानुगत बीमारी है जिसके परिणामस्वरूप बौद्धिक हानि और शारीरिक असामान्यताएं होती हैं। यह जन्म के समय या जन्म से पहले का एक जीन दोष है और यह जीवन भर चलने वाली स्थिति है। आम तौर पर एक व्यक्ति में 46 गुणसूत्र होते हैं लेकिन इस स्थिति से पीड़ित व्यक्ति में 47 गुणसूत्र होते हैं और एक अतिरिक्त गुणसूत्र होने से शरीर और मस्तिष्क के कार्य करने के तरीके में बाधा आती है। इस आनुवांशिक बीमारी से पीड़ित बच्चों को बचपन में ल्यूकेमिया, हृदय विकार और प्रतिरक्षा और अंतःस्रावी तंत्र की शिथिलता का अधिक खतरा होता है।
मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) यानी चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग में डाउन सिंड्रोम (डीएस) से पीड़ित व्यक्तियों के मस्तिष्क के विविध हिस्सों में असामान्यता दिखाई देती है। इसके अलावा, न्यूरोजेन बीएसआई में डीएस के मरीजों के लिए ब्रेन पीईटीध्सीटी अध्ययन भी किया गया था, जो सेरिबैलम, मेडियल टेम्पोरल कॉर्टेक्स, ऑर्बिटोप्रहृॉन्टल कॉर्टेक्स और एंटेरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स में हाइपोमेटाबोलिज्म को दर्शाता है।
यद्यपि डाउन सिंड्रोम के लिए कोई इलाज नहीं है, लेकिन व्यक्तिगत चिकित्सा मुद्दों को संबोधित करने के लिए कई प्रकार के उपचार और चिकित्सा विधाएं हैं। उदाहरण के लिए, हाइपोथायरायडिज्म को दवा के साथ प्रबंधित किया जा सकता है, हृदय विकार की गंभीर स्थितियों में सर्जरी से मदद हो सकती है। हालांकि वर्तमान में डाउन सिंड्रोम जैसे न्यूरोलॉजिकल विकार के मामले में कोई उपचार विकल्प उपलब्ध नहीं हैं। भौतिक, व्यावसायिक, भाषण, मनोवैज्ञानिक और व्यवहार संबंधी हस्तक्षेप जैसे उपलब्ध पुनर्वास उपचार केवल अस्थायी रूप से लक्षणों का प्रबंधन करते हैं, लेकिन मूल अंतर्निहित न्यूरोपैथोलॉजी का इलाज करने। 

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