हिंदुओं ने रात में चुपके से रखी थी रामलला की मूर्ति: सुन्नी वक्फ बोर्ड

नई दिल्ली। अयोध्या में विवादित स्थल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। मंगलवार को पांच जजों की संविधान पीठ के सामने मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने दलीले पेश की।

सुन्नी वक्फ बोर्ड और उसके अन्य सहयोगियों की ओर से राजीव धवन और एजाज मकबूल ने कहा, विवादित स्थल पर कोई चमत्कार नहीं हुआ था, बल्कि हिंदुओं ने 22-23 दिसंबर 1949 को रात के अंधेरे में चुपके से रामलला की मूर्ति अंदर रखी थी। यह सुनियोजित हमला था।

धवन ने तारीखवार घटनाक्रम पेश कर अपना दावा साबित करने की कोशिश की। नई दुनिया की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, केंद्रीय गुंबद के नीचे रामलला की मूर्ति साजिशन हमला कर चुपके से रखी गई थी। इस साजिश की शुरुआत तो 19 मार्च, 1949 को हो गई थी जब निर्मोही अखाड़ा ने पंजीकरण कराया था और पहली बार राम जन्मभूमि मंदिर का जिक्र किया था।

बकौल धवन, 22-23 दिसंबर की रात अंदर मूर्ति रखी गई। इसकी एफआईआर हुई। उसके पहले 29 नवंबर, 1949 को फैजाबाद के एसपी किरपाल सिंह ने तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर केके नायर को सूचित किया था कि यह अफवाह जोरों पर है कि हिंदू पूर्णमासी को मस्जिद में जबरन घुस कर मूर्ति रखने की कोशिश करेंगे।

इस पर जस्टिस एसए बोबडे ने धवन से सवाल किया कि पूर्णमासी के दिन क्या हुआ था। धवन इसका जवाब नहीं दे पाए, कहा पता करेंगे। धवन ने फैजाबाद के डिप्टी कमिश्नर और जिलाधिकारी केके नायर के 16 दिसंबर, 1949 को उत्तर प्रदेश के गृह सचिव गोविंद नारायण को लिखे पत्र का हवाला दिया, जिसमें डिप्टी कमिश्नर ने लिखा था कि वहां विक्रमादित्य ने भव्य मंदिर बनवाया था जिसे बाबर ने 16वीं शताब्दी में तोड़ दिया और वहां मस्जिद बनवाई। मस्जिद में मंदिर की सामग्री का उपयोग किया था।

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