आखिर सोनिया और राहुल गांधी कांग्रेस में क्या चाहते हैं?

एसपी मित्तल 
10 अगस्त को दिल्ली में कांग्रेस का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने के लिए कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हुई। इस बैठक में कोई निर्णय हो पाता इससे पहले ही निवर्तमान अध्यक्ष राहुल गांधी ने ऐलान कर दिया कि अभी और विचार विमर्श की जरूरत है। यही वजह रही कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने नए अध्यक्ष को लेकर जो प्लान बनाया था उस पर पानी फिर गया।

अब वर्किंग कमेटी से जुड़े 35 नेता आपस में विचार विमर्श करेंगे तब कोई निर्णय होने की उम्मीद है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी कांग्रेस में क्या चाहते हैं? एक ओर कोई स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं देते और दूसरी ओर बड़े नेता जो योजना बनाते हैं उस पर ऐनमौके पर पानी फेर दिया जाता है। दस अगस्त को भी जब राहुल गांधी के फरमान के बाद वर्किंग कमेटी के सदस्यों ने आपसी विचार विमर्श शुरू किया तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी बैठक छोड़ कर चले गए।

राहुल का कहना रहा कि उन्हें बाढ़ ग्रस्त केरल के दौरे पर जाना है। जबकि सोनिया गांधी ने कहा कि वे विचार विमर्श की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनना चाहती। अलबत्ता बहन और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी बैठक में उपस्थित रहीं। लेकिन सोनिया और राहुल के बगैर वर्किंग कमेटी बैठक को चलाए रखने की हिम्मत किसी भी नेता की नहीं थी। थोड़ी ही देर में बैठक को खत्म कर दिया गया। अब कहा जा रहा है कि 11 अगस्त को फिर से वर्किंग कमेटी की बैठक होगी। लोकसभा चुनाव में हार मिलने के बाद 25 मई को राहुल गांधी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

ढाई माह गुजार जाने के बाद भी नया अध्यक्ष नहीं बन सका है। इस बीच कांग्रेस में लगातार बिखराव हो रहा है। कांग्रेस को नियंत्रित करने वाला कोई नेता नहीं है। इसलिए सांसद, विधायक कांग्रेस भी पार्टी छोड़ रहे हैं। कांग्रेस की बुरी दशा की वजह से ही राज्य सभा में अल्पमत होते हुए भी भाजपा ने तीन तलाक, अनुच्छेद 370 में बदलाव जैसे बिल स्वीकृत करवा लिए। खुद कांग्रेसियों की समझ में नहीं आ रहा कि संगठन का क्या होगा।  हालांकि कांग्रेस की पंजाब राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तसीगढ़ जैसे बड़े राज्योंमें सरकारें हैं। लेकिन इन सरकारों पर नियंत्रण करने वाला भी कोई नहीं है। राज्यों के मुख्यमंत्री अपने स्तर पर ही निर्णय ले रहे हैं।

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