क्या राहुल गांधी में इतनी कूव्वत है कि वे साधारण कार्यकर्ता बन कर कांग्रेस को फिर से सत्ता में ला सकेंगे?

एसपी मित्तल 
ढाई माह की माथा पच्ची के बाद भी 100 वर्ष पुरानी कांग्रेस पार्टी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं कर सकी, इसलिए 10 अगस्त की आधी रात को दोबारा से श्रीमती सोनिया गांधी को अध्यक्ष मान लिया गया। इस पद पर सोनिया गांधी पहले भी 19 वर्ष तक रह चुकी हैं। सोनिया के पति राजीव गांधी, राजीव गांधी की माताजी इंदिरा गांधी और इंदिरा गांधी के पिता जवाहरलाल नेहरू भी कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।

सोनिया गांधी के पुत्र राहुल गांधी भी दो वर्ष तक कांग्रेस अध्यक्ष रहे। यानि अधिकांश समय गांधी परिवार का सदस्य ही अध्यक्ष रहा। किसी कांग्रेसी को तभी अध्यक्ष बनाया गया, जब प्रधानमंत्री की कुर्सी पर गांधी परिवार का सदस्य विराजमान रहा। गांधी परिवार के इशारे पर काम करते रहने तक ही कोई कांग्रेसी अध्यक्ष पद पर रहा। जरा भी चू चपड़ की तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। कांग्रेस की ऐसी पंरपरा में राहुल गांधी ने उम्मीद जताई कि गांधी परिवार का कोई कांग्रेसी अध्यक्ष बन जाए।

राहुल गांधी ने 25 मई को इस्तीफे की पेशकश कर दी थी, लेकिन ढाई माह में अध्यक्ष तय नहीं हो पाया। आखिर श्रीमती सोनिया गांधी को ही फिर से अध्यक्ष बना दिया गया। राहुल गांधी ने दो वर्ष पहले अपनी माताजी श्रीमती सोनिया गांधी से अध्यक्ष का पद संभाला था। यानि अब राहुल गांधी ने फिर से अपनी माताजी को पद सौंप दिया। मुझे नहीं पता कि राहुल के मन में कांग्रेस संगठन को लेकर क्या चल रहा हैं, लेकिन राहुल गांधी यह अच्छी तरह समझ लें कि गांधी परिवार के बगैर कांगे्रस का कोई वजूृद नहीं है। अब सौ वर्ष पुरानी कांग्रेस गांधी परिवार पर ही निर्भर है। पुराने और नए कांग्रेसियों ने बहुत अच्छा किया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बने। क्या सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के रहते कोई कांग्रेसी राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकता है? राहुल गांधी ने बड़ी चतुराई से नया अध्यक्ष चुनने का काम कांग्रेसियों पर छोड़ दिया। राहुल को भी पता था कि जूतों में दाल बांटने वाली कहावत चरितार्थ होगी। हुआ भी ऐसा ही। अब सोनिया और राहुल को भी पता चल गया है कि कौन से कांग्रेसी गांधी परिवार के प्रति वफादार हैं।
राहुल की कूव्वत
10 अगस्त को भी कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में राहुल गांधी से इस्तीफा वापस लेने का आग्रह किया गया, लेकिन राहुल ने कहा कि वे साधारण कार्यकर्ता की तरह पार्टी का काम करते रहेंगे। पहले से भी ज्यादा समय पार्टी को देंगे। सवाल उठता है कि क्या राहुल गांधी में इतनी कूव्वत (योग्यता, लोकप्रियता, समझदारी आदि) है कि वे कांग्रेस को फिर से सत्ता में ले आएंगे? यानि राहुल गांधी किसी शहर में सभा करने जाएंगे तो उनके नाम से ही लाखों लोग उमड़ पड़ेंगे। राहुल के आव्हान पर देशभर में जन आंदोलन शुरू हो जाएंगे। देश की जनता कांग्रेस अध्यक्ष (जो भी हो) से ज्यादा राहुल को मानेगी। कांग्रेस के कार्यकर्ता भी राहुल की योग्यता और दक्षता के कायल रहेंगे। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री राहुल गांधी की नीतियों पर ही शासन करेंगे। सब जानते हैं कि  राहुल गांधी को प्रधानमंत्री की तरह मिलने वाली एसपीजी की सुविधा मिली हुई है। यह सुविधा अकेले राहुल को ही नहीं बल्कि उनकी माताजी सोनिया और बहन प्रियंका को भी उपलब्ध है। एसपीजी की सुरक्षा की वजह से राहुल गांधी का वैसे ही आभा मंडल बना हुआ है। सभा होने पर मंच आदि पर सुरक्षा के इंतजाम एसपीजी द्वारा किए जाते हैं। राहुल को भी पता है कि एसपीजी की सुविधा की वजह से उनकी अलग हैसियत है। यदि राहुल को एसपीजी की सुविधा न हो तो साधारण कार्यकर्ता होने का अहसास राहुल को हो जाए। शायद राहुल को कांग्रेस के साधारण कार्यकर्ता की पीड़ा का अहसास नहीं है। जो कार्यकर्ता वर्षों से दरी उठाने, माइक लगाने, पोस्टर चिपकाने आदि का कार्य कर रहे हैं वो आज भी ऐसा ही कर रहे हें। बहुत कम कार्यकर्ता हैं जो बगैर एप्रोच, जातिवाद, धनबल आदि के बगैर सांसद विधायक बने हैं। राहुल गांधी तो राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोड़ कर साधारण कार्यकर्ता बन रहे हैं। जबकि साधारण कार्यकर्ता कोई पद पाने के लिए लालायित हैं क्योंकि उसे पता है कि कांग्रेस में साधारण कार्यकर्ता की कोई वकत नहीं है। वह किसी भी कीमत पर आगे बढऩा चाहता है। अब देखना है कि राहुल गांधी साधारण कार्यकर्ता की हैसियत से कांग्रेस को कितना मजबूत करते हैं। वैसे माताजी सोनिया गांधी के अध्यक्ष बन जाने से राहुल गांधी सुपर अध्यक्ष की भूमिका में होंगे।
(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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