इस मंदिर में भगवान शिव की स्त्री रूप में होती है पूजा

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में सदियों पुरानी एक गुफा में शिवलिंग को भगवान शिव का स्त्री रूप लिंगेश्वरी माता के रूप में पूजा होती आ रही है।

साल में एक सिर्फ एक बार इस मंदिर के पट खुलते हैं और ऐसी मान्यता है कि यहां आने वाले निःसंतान दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ती होती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जिला मुख्यालय कोंडागांव से लगभग 38 किलोमीटर की दूरी पर फरसगांव से बड़े डोंगर मार्ग में ग्राम आलोर स्थित है। आलोर को बस्तर रियासत की प्राचीन कचहरी भी कहा जाता है। आलोर ग्राम के झांटीबंध पारा में स्थित पहाड़ी में एक पुरानी गुफा स्थित है। जिसका द्वार वर्ष में सिर्फ एक ही दिन नयाखानी पर्व के बाद आने वाले प्रथम बुधवार को खुलता है।

यहां प्रतिवर्ष आने वाले श्रद्धालु महेश कुमार नाग ने बताया कि इस बार अंचल में निवासरत सर्व आदिवासी समाज द्वारा नयाखानी पर्व मनाया गया और बुधवार को गुफा का प्रवेश द्वार खुला है। ग्राम आलोर के उत्तर-पश्चिम दिशा में एक पहाड़ी में विशाल चट्टान से बनी स्तूपाकार गुफा के अंदर शिवलिंग स्थित है।

जिसमें सुरंगनुमा प्रवेश द्वार से लेटते हुए श्रद्धालु गुफा के अंदर घुसते हैं। गर्भगृह में पूजा के लिए सिर्फ 15-20 लोग एक बार में बैठ सकते हैं। गुफा के अंदर बीचों-बीच पत्थर का डेढ़ से दो फीट ऊंचा शिवलिंग स्थित है। जिसे स्थानीय हल्बी बोली में 'लिंगई आया' (लिंगई माता) कहते हैं। कहा जाता है कि यह शिव लिंग की आकृति साल दर साल धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है।


क्षेत्रवासियों के बीच मान्यता है कि निःसंतान दंपतियों को यहां आकर मन्नत मांगने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। 

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