क्या नए मोटर व्हीकल एक्ट को लेकर गडकरी और सरकार में मतभेद हैं?

एसपी मित्तल 
केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी कई बार ऐसे बयान देते हैं जिससे नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार के सामने संकट खड़ा होता है। ताजा संकट नए मोटर व्हीकल एक्ट में जुर्माना राशि को लेकर है। वैसे तो गडकरी सड़क मंत्री हैं, लेकिन अब गड़करी का कहना है कि नए एक्ट को लागू करने की उनकी अकेले की जिम्मेदारी नहीं है।

गडकरी के इस बयान से साफ जाहिर है कि उनकी अपनी ही सरकार के प्रति नाराजगी है। सब जानते हैं कि गडकरी के मंत्रालय में प्रधानमंत्री भी हस्तक्षेप नहीं करते हैं। इसका एक कारण यह भी कि खुद गडकरी बहुत मेहनत के साथ अपना काम करते हैं। पिछले पांच वर्षों में जिस तेजी से नेशनल हाइवे बने उतने साठ सालों मेेें नहीं बने। गडकरी के कामकाज की प्रधानमंत्री भी प्रशंसा कर चुके हैं, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि नए मोटर व्हीकल एक्ट में जुर्माने की राशि को लेकर गडकरी अकेले पड़ गए हैं। कांग्रेस शासित राज्यों ने तो पहले ही एक्ट को मानने से इंकार कर दिया था, लेकिन गडकरी को तब धक्का लगा जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाजपा शासित राज्य गुजरात ने भी एक्ट के जुर्माने में संशोधन कर दिया।

अब गडकरी के अपने राज्य महाराष्ट्र ने भी संशोधन की बात कही है। चुनाव को देखते हुए दिल्ली से सटे हरियाणा ने भी जुर्माना राशि को ज्यादा बताया है। सवाल उठता है कि गडकरी ने नया एक्ट बनाते समय राज्यों से संवाद नहीं किया? यह माना कि संविधान के मुताबिक मोटर व्हीकल एक्ट देशभर में एक समान होता है और इसके प्रावधान राज्यों को भी लागू करने पड़ते हैं। लेकिन जुर्माना राशि को कम करने का अधिकार राज्यों को है। जबकि गडकरी का तर्क है कि दुर्घटना को रोकने के लिए जुर्माना राशि अधिक रखी गई है।

अब जब राज्य अपने स्तर पर जुर्माना राशि को कम कर रहे हैंं तो फिर गडकरी के तर्क का क्या होगा? नए मोटर व्हीकल एक्ट को लेकर विरोध के जो हालात हैं उसमें आने वाले दिनों में गडकरी कह सकते हैं कि जब राज्य अपने लोगों को ही मारना चाहते हैं तो वे क्या कर सकते हैं? सब जानते हैं कि गडकरी अपने स्वभाव की वजह से नए एक्ट पर पुनर्विचार नहीं करेंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में पता चलेगा कि नए एक्ट का क्या होता है? फिलहाल देशहित में गडकमरी का स्वस्थ रहना जरूरी है।
(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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