सिंथेटिक दूध बना रहा लोगों को रोगी, मुश्किल होता है पहचान करना

मोहम्मद आमिल/आगरा।  दूध सेहत के लिए सबसे फायदेमंद माना जाता हैं, लेकिन अगर यही दूध सेहत के लिए नुकसानदायक बन जाएं तो लोगों की जान पर बन आएगी। ऐसा शहर में हो रहा हैं। दूध माफिया सिंथेटिक दूध की शहर में धड़ल्ले से सप्लाई कर रहे हैं। सफेद जहर के नाम पर परोसा जा रहा सिंथेटिक दूध लोगों को रोगी बना रहा हैं। शुद्व दूध तो उनको नसीब हो पा रहा है जो दुधारू पशुओं को पाल रहे हैं। बाजार में या दूधियों से मिलने वाला दूध में शुद्वता की कोई गारंटी नही हैं। शहर में दूध की कई हजार लीटर खपत प्रतिदिन होती हैं।
सिंथेटिक दूध लोगों की सेहत बनाने की जगह बिगाड़ रहा हैं। माफियाआंे द्वारा एक सुबह से सप्लाई होने वाला सफेद जहर प्रतिदिन घरों में पहुंच रहा हैं। यह दूध लोगों को उदर जनित बीमारियों से ग्रसित कर रहा हैं। दुधारू पशुओं के बढ़ते दामों व हरे चारे मंे आती कमी के कारण क्षेत्र में पशुपालकों की संख्या में भारी गिरावट हो रही हैं, जबकि इसके विपरीत लगातार दूध की मांग में वृद्वि हो रही हैं। सूत्रों की माने तो दूध की मांग को पूरा करने के लिए माफिया यूरिया, माल्टा, वाशिंग पाउडर, गर्म कपडों की ईजी, रिफाइंड आदि की मिलावट करके सिंथेटिक दूध तैयार करते हैं। ऐसे में जहरीला दूध पीकर लोग बीमारी की जद में आ रहे हैं। दूध में श्ता तो कम हो गयी वही अशुद्वता भरपूर मात्रा में पहुंच गयी। मिलावट के चलते सम्पूर्ण आहार कहे जाने वाले दूध से अब पौष्टिक तत्वों की कमी हो गयी हैं।

मुश्किल होता है पहचान करना
शहर में सिंथेटिक दूध के कारोबार ने पूरी तरह से पैर पसार लिए हैं। सिंथेटिक दूध की पहचान करना भी मुश्किल हो जाता हैं। दूध असली है या नकली इसकी पहचान आप सूंघकर या पीकर पता नही कर सकते। मिलावट खोर दूध में मिठास के लिए ग्लूकोज की मिलावट कर सिंथेटिक दूध में मिठास कायम रखते हैं। सूत्रों की माने तो भैंस के दूध में 86 प्रतिशत पानी सात से आठ प्रतिशत तक वसा की मात्रा होती हैं। वही मिलावट वाले दूध में वसा की मात्रा बिल्कुल नही होती। 
डेयरियों ने बढ़ा दिए दूध के दाम
शुद्व दूध की कमी व बढ़ते दामों के पीछे कही हद तक डेयरी संचालक भी माने जाते हैं। जहंा मार्केट में दूध 35 से 40 रूपए लीटर बिक रहा है वही डेयरी संचालक दूध को 50 से 60 रूपए लीटर तक खरीद रहे हैं। ऐसे में दूध का कारोबार करने वाले लोग डेयरी पर दूध बेचना पंसद करते हैं।

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