मुस्लिम परिवार ने किया एक बूढ़े ब्राह्मण का अंतिम संस्कार!

अहमदाबाद। ये कहानी है दो अलग- अलग धर्मों को मानने वाले दो दोस्त भानुशंकर पांडे और भीखु कुरैशी की। दोनों की दोस्ती की शुरूआत हुई पेट पालने की दौड़ से। दोनों साथ काम करते और खुश रहते।

कुरैशी के गुजरने के बाद पांडे ज्यादा साल जी न सका। जब उसकी मौत हुई तो कुरैशी परिवार में मातम का माहौल छा गया। तब कुरैशी परिवार के बेटों ने ठाना कि वो उनके धर्म के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करेंगे।

अबु, नासिर और ज़ुबेर का कहना है कि भानु अंकल और उनके पिता पिछले चार दशक से दोस्त थे। एक बार कहीं से गिरने पर भानु अंकल की टांग फ्रैक्चर हो गई थी। उनका ख्याल रखने के लिए कोई नहीं था इसलिए वो हमारे साथ रहने लगे। वो पूजा पाठ करते और हम दिन में पांच दफा नमाज। फिर पिता के जाने के बाद वो जैसे गुमसुम से रहने लगे और जल्द ही शांत हो गए।

सबसे पहले पड़ोस से गंगाजल मंगवाया गया। लोगों ने जनेऊ धारण करने की सलाह दी। उन्होने धोती पहनी और जनेऊ धारण कर उनका अंतिम संस्कार किया। रिवाज के अनुसार एक बेटे ने अग्नि दी और उसका मुंडन भी किया जाएगा। कुरैशी परिवार के इस काम को सराहते हुए पराग त्रिवेदी जो कि अमरेली जिला ब्रह्म समाज के वाइस प्रेसीडेंट है, ने उनकी खूब प्रशंसा की।


Source : upuklive

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