20 मुस्लिम देशों में तीन तलाक़ पर प्रतिबंध तो फिर भारत में विरोध क्यों?

एसपी मित्तल 
25 जुलाई को तीन बड़े संशोधन के साथ तीन तलाक का बिल लोकसभा में पेश कर दिया है। लेकिन इसके साथ ही कांग्रेस, सपा, बसपा, टीएमसी, जेडीयू आदि ने इस बिल का विरोध किया है। केन्द्रीय विधि एवं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल को प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह बिल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप प्रस्तुत किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि एक साथ तीन तलाक कहना मुस्लिम धर्म की भावनाओं के विपरीत है। इसलिए बीस मुस्लिम देशों में तीन तलाक  को प्रतिबंध किया गया है।

मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश में 575 घरेलू हिंसा के मामले सामने आए इनमें से 345 तीन तलाक के मामले हैं। इससे साफ जाहिर है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी तीन तलाक की घटनाएं नहीं रुक रही हैं। मुस्लिम समाज में छोटी छोटी बातों पर पत्नी को एक साथ तीन तलाक कह कर छोड़ा जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सुप्रीम कोर्ट का आदेश घर में टांगने के लिए है। हमने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप ही बिल तैयार किया है। उन्होंने कहा कि पूर्व में प्रस्तुत बिल पर तीन प्रमुख आपत्ति जताई गई थी। इस नए बिल में तीनों आपत्तियों का समाधान कर दिया गया है। अ

ब पुलिस में रिपोर्ट पीडि़ता स्वयं दर्ज कराए या फिर उसके परिवार का कोई सदस्य। इसी प्रकार पीडि़ता को सुनने के बाद अदालत पति को जमानत दे सकती है। इस बिल में समझौते की गुंजाइश भी रखी गई है। उन्होंने कहा कि इस बिल को राजनीति और धर्म के चश्में से नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि यह बिल नारी की गरिमा और सम्मान जुड़ा हुआ है। बिल के प्रस्तुत होने के साथ ही कांग्रेस और विपक्षी दलों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। बिल को मुस्लिम धर्म में हस्तक्षेप माना जा रहा है। जबकि जानकारों का कहना है कि कुरान शरीफ में भी एक साथ तीन तलाक कहकर पत्नी को छोडऩे का कोई उल्लेख नहीं है। कुरान में तलाक की जो प्रक्रिया बता रखी है उसमें तीन माह में तीन बार तलाक कहने पर ही पत्नी को छोड़ा जा सकता है। एक माह में एक बार तलाक कहना होगा। यह प्रक्रिया इसलिए निर्धारित की है यदि कोई शौहर गुस्से में एक बार तलाक कह दे तो उसे दूसरे माह अपनी गलती सुधारने का अवसर भी मिलता है।

तीसरे माह में समझौते की गुंजाइश भी बनी रहती है, लेकिन अब एक साथ तीन तलाक कहकर पत्नी को छोडऩे के मामले उजागर हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में तो वाट्सएप और पोस्टकार्ड पर तीन बार तलाक लिखकर पत्नी को छोड़ा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि एनडीए के पहले कार्यकाल में लोकसभा से तीन तलाक का बिल पास हो चुका था, लेकिन राज्यसभा में बहुमत नहीं होने की वजह से यह बिल राज्यसभा में पास नहीं हो सका। इसलिए बिल कानून नहीं बन सका। लेकिन अब भाजपा और उसके सहयोगी दलों को उम्मीद है कि राज्यसभा से भी बिल पास हो जाएगा। हालांकि भाजपा की गठबंधन सरकार को समर्थन देने वाले जेडयू ने बिल का विरोध किया है।

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