अब आरबीआई ने लक्ष्मी विलास बैंक पर लगाई पाबंदी

सरकार लाख दावे करे लेकिन अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटती दिखाई नहीं दे रही है. अर्थव्यवस्था दलीलों से नहीं चलती लेकिन सरकार ऐसा ही करने में लगी है. मंदी से देश संकट में है. रोजगार जा रहे हैं और सरकार गाल बजाने में लगी है. बैंकों का या तो विलय हो रहा है या उन पर पाबंदी लग रही है. पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक में वित्तीय गड़बड़ियों की वजह से लेनदेन पर प्रतिबंध लगाने के बाद अब रिजर्व बैंक ने लक्ष्मी विलास बैंक पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी हैं. रिजर्व बैंक ने लक्ष्मी विलास बैंक की कमजोर वित्तीय हालत को देखते हुए उसके खिलाफ त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) व्यवस्था के तहत कर्ज देने और नई शाखा खोलने पर रोक लगा दी है. बताया जा रहा है कि लक्ष्मी विलास बैंक में जोखिम से बचाव के लिए पर्याप्त पूंजी के अभाव, दो लगातार साल से संपत्तियों पर नुकसान और बड़ी संख्या में फंसे लोन रकम को देखते हुए रिजर्व बैंक ने यह कदम उठाया है. पीसीए के तहत लक्ष्मी निवास बैंक पर कर्ज देने, नई शाखाएं खोलने और लाभांश का भुगतान करने पर रोक लग गई है. बैंक को चुनिंदा क्षेत्रों को दिए कर्ज में कमी लाने पर भी काम करना होगा. लक्ष्मी विलास बैंक ने नियामक को इसकी जानकारी दी. रिजर्व बैंक ने यह कार्रवाई ऐसे समय की है जब दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने धोखाधड़ी और कोष के दुरुपयोग को लेकर लक्ष्मी विलास बैंक के निदेशक मंडल के खिलाफ मामला दर्ज किया है. रिजर्व बैंक के त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई से इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस का लक्ष्मी विलास बैंक में प्रस्तावित विलय अधर में अटक गया है. विलय को अभी रिजर्व बैंक से मंजूरी नहीं मिली है. रिजर्व बैंक ने 31 मार्च, 2019 को समाप्त वित्तीय वर्ष के लिए जोखिम की निगरानी के तहत हुई जांच के बाद यह कार्रवाई शुरू की. वित्त वर्ष 2018-19 में लक्ष्मी निवास बैंक का शुद्ध एनपीए 7.49 फीसद, पूंजी पर्याप्तता अनुपात 7.72 फीसद रहा और संपत्तियों पर 2.32 फीसद नुकसान हुआ. बैंक को 2018-19 में 894.10 करोड़ रुपए का घाटा हुआ. लक्ष्मी निवास बैंक ने कहा कि रिजर्व बैंक की कार्रवाई से उसका प्रदर्शन बेहतर होगा और सामान्य तौर पर जमा स्वीकार करने या पुनर्भुगतान समेत उसके दैनिक परिचालन पर प्रतिकूल असर नहीं होगा. लक्ष्मी निवास बैंक ने अलग से बीएसई को बताया कि उसे प्रतिभूति कर एक हजार करोड़ रुपए की पूंजी जुटाने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी मिल गई है. पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक में वित्तीय गड़बड़ियों के सामने आने के बाद आरबीआई ने इसी हफ्ते बैंकत पर कई प्रतिबंध लगा दिए थे. पहले ग्राहकों के लिए छह महीने में निकासी की सीमा एक हजार रुपए रखी गई थी, हालांकि इसे बढ़ाकर दो दिन बाद दस हजार रुपए कर दिया गया. दूसरी तरफ, पीएमसी बैंक न तो कर्ज दे सकता है और न ही कोई निवेश कर सकता है. ग्राहकों को इससे काफी परेशानी हो रही है. सरकार के इस कदम से लोगों में बेतरह नाराजगी है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).

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