बैलगाड़ी पर चलने वाली लाइब्रेरी बच्चों के लिए साबित हो रही वरदान

महाराष्ट्र में एक शख्स बैलगाड़ी पर चलती-फिरती लाइब्रेरी चला रहा है। जी हां, महाराष्ट्र के सोलापुर के दर्गेनहल्ली गांव में किताब पढ़ने वालों की संख्या अधिक से अधिक बढ़े और बच्चे पढ़ने में रूचि ले, इसके लिए यहां पर पिछले 6 महीने से एक शख्स प्रयास कर रहा है। गांव के लोगों को अधिक से अधिक संख्या में किताबों का अध्ययन कराने के लिए गांव में चलती-फिरती लाइब्रेरी खोल दी है।

उन्होंने दर्गेनहल्ली गांव में बैलगाड़ी से चलती फिरती लाइब्रेरी खोली है। यह लाइब्रेरी चलती फिरती है और गांव के बच्चों को अब घर बैठे मुफ्त में किताबें पढ़ने को मिल रही है। लाइब्रेरी चलाने वाले शख्स का नाम है काशीनाथ कोली जो कि पिछले छह महीने से गांव में बैलगाड़ी पर लाइब्रेरी चला रहे हैं और उनके पास इस समय करीब डेढ़ हजार किताबें है।

यह किताबें चलती फिरती बैलगाड़ी पर रखी रहती है और लाइब्रेरी से ग्रामीण इलाके के बच्चों तक पहुंचती है। गांव में लाइब्रेरी चलाने वाले काशीनाथ कोली सोलापूर की एक सिटी लाइब्रेरी में ऑफिस बॉय का काम करते हैं। काशीनाथ अपने विकली ऑफ और छुट्टी के दिन दर्गेनहल्ली गांव में बैलगाड़ी में किताबें डालकर लेकर निकल पड़ते हैं। यही नहीं वह दर्गेनहल्ली गांव के मोहल्ले, खेतों तक उसकी बैलगाड़ी में चलने वाली मोबाइल लाइब्रेरी पहुंच जाती है।

 गांव में उनकी चलने वाली यह बैलगाड़ी वाली मोबाइल लाइब्रेरी अब दर्गेनहल्ली गांव की पहचान बनी है। इस मोबाइल बैलगाड़ी के जरिए टीव्ही में बच्चों का ध्यान ज्यादा रहता है। अब बच्चे ऐसे में किताब पढ़ने में अधिक रुचि ले रहे हैं।

वहीं काशीनाथ भी बच्चों को पढ़ाने की तरफ अधिक से अधिक ध्यान रख रहे हैं। बैलगाड़ी लाइब्रेरी को चलाने वाले काशीनाथ कोली कहते हैं कि मुझे अपनी लाइब्रेरी का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। अब बैलगाड़ी लाइब्रेरी से छोटे-छोटे बच्चे पढ़ने में रूचि भी ले रहे हैं। 

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