आपस में कभी नही मिलते ये 2 दरिया, क़ुरान में भी है ज़िक्र

नई दिल्ली। क्या आपको मालूम है कि सूर ए रेहमान में दो दरिया का ज़िक्र है , जिसकी खास बात ये है की दो दरिया होने के बाद भी आपस में नहीं मिलते है , और दोनों दरिया का पानी अलग अलग दिखाई देता है !
हज़रत अली से रिवायत है की नबी ने फ़रमाया की हर चीज़ का हुस्नोजमाल (खूबसूरती ) होता है , और क़ुरान का हुस्नोजमाल सूरए रेहमान है ,सूरए रेहमान क़ुरान का दिल है इन दो दरिया की खास बात ये है की ये दोनों एक ही समंदर में बहते है जब की दोनों का पानी एक साथ बहने के बावजूद आपस में नहीं मिलता !
एक दरिया का ज़ायका बहुत ही कड़वा, और दोसरे दरिया का बहुत ही मीठा है , ये चश्मा इस नये दौर में क़ुरान ए पाक की हक़ानियत (यानी सच्चाई ) का मुह बोलता सुबोत है, अल्लाह ने दो समंदर बहाये है ये अल्लाह की कुदरत ही है।


यही वह दो दरिया है जिनका ज़िक़्र कुरआन सूर ए रेहमान में है ।इन दोनों के बीच सिर्फ अल्लाह के हुक्म की आड़ है जिससे यह आपस में नहीं मिलते ।समझने वालों के लिए अल्लाह ने निशानिया छोड़ी है ।

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