अनुच्छेद 370 में बदलाव पर कांग्रेस में बगावत के हालात

एसपी मित्तल 
माना तो यही जाता है कि देश को आजाद करवाने में कांग्रेस की भूमिका रही है, लेकिन 70 साल बाद जब अनुच्छेद 370 में बदलाव किया गया तो सौ वर्ष पुरानी कांग्रेस बिखर गई। इस अनुच्छेद के प्रावधान को कांग्रेस ने ही लागू किए थे, जिसकी वजह से जम्मू कश्मीर राज्य भारत से कटा रहा। कांग्रेस के नेताओं के सरंक्षण में अब्दुल्ला और मुफ्ती के परिवारों ने जो हालात बिगाड़े उसी का नतीजा है कि कश्मीर घाटी पर पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकियों का कब्जा हो गया है।

कश्मीर के हालातों से पूरा देश परेशान रहा, इसलिए जब नरेन्द्र मोदी की सरकार ने अनुच्छेद 370 में बदलाव कर जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म किया तो पूरा देश सरकार के साथ खड़ा हो गया। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के मित्र माने जाने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मोदी सरकार के पक्ष में खड़े हो गए। कांग्रेस के कई नेताओं ने खुले आम अपनी ही पार्टी की आलोचना की है। एक तरह से कांग्रेस में अब बगावत जैसे हालात हैं।

राज्यों में कांग्रेस के नेता पहले ही भाजपा में शामिल हो रहे थे, लेकिन अब केन्द्रीय नेता भी राहुल गांधी वाली कांग्रेस से पीछा छुड़ाना चाहते हैं। सोनिया गांधी के अध्यक्षीय कार्यकाल में संगठन महासचिव रहे जनार्दन द्विवेदी सबसे बड़ा उदाहरण हैं। जब द्विवेदी जैसे वरिष्ठ कांग्रेसी का मोह भंग हो गया है तो बगावत के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। सौ वर्ष पुरानी कांग्रेस की स्थिति कितनी खराब हो गई है, इसका अंदाजा राहुल गांधी के इस्तीफे से लगाया जा सकता है।

लोकसभा चुनाव में हार के बाद मई माह में ही राहुल ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने आज तक भी इस्तीफे पर कोई निर्णय नहीं लिया है। कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। जब कांग्रेस का स्वयं का नेतृत्व ही कमजोर है, तो विपक्ष की एकता क्या होगा? तीन तलाक और अनुच्छेद 370 में बदलाव के प्रस्तावों पर राज्यसभा में कांगे्रस और विपक्षी दलों के सांसदों ने खुली बगावत की। कांग्रेस को अपनी भूमिका जल्द तय करनी चाहिए।

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