सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- लोगों की निजता का संरक्षण करे सरकार

सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का बड़ा माध्यम बन गया है. जो खबरें आजकी मुख्यधारा का मीडिया छुपा लेता है या सरकार के एजंडे पर काम करते हुए उन खबरों को नहीं दिखाता है, सोशल मीडिया पर इस तरह की खबरें चलती और चलाई जातीं हैं. सियासतदानों से लेकर फिल्मों, खेलों की दुनिया के अलावा उद्योगपति सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं. मुख्यधारा की मीडिया भी अब सोशल मीडिया के जरिए ही खबरें चलाने में ज्यादा दिलचस्पी लेता है. लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों की निजता पर तो सवाल खड़े किए जाते ही हैं, विचारों की अभिव्यक्ति को कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है. वैचारिक तौर पर विरोध करने के लिए सोशल मीडिया पर लोगों की निजता पर भी हमला किया जाता है और गाली-गलौज तो आम सी बात हो गई है. भाषा के स्तर पर भी अभद्रता बरती जाती रही है. महिलाओं को बलात्कार तक की धमकी सोशल मीडिया पर ट्रोलर देते रहे हैं. इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें और फोटो भी धड़ल्ले से डाली जाती रही है जिससे समाज में नफरत फैलती है. सोशल मीडिया के दुर्व्यवहार पर अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ा एतराज जताया है. सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार से ऐसे मामलों से निपटने के लिए सख्त नियम बनाने की बात कही है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि व्यक्ति की निजता का संरक्षण करना सरकार की ही जिम्मेदारी है. कोई किसी को ट्रोल क्यों करे और झूठी जानकारी क्यों फैलाए. आखिर ऐसे लोगों की जानकारी जुटाने का हक क्यों नहीं है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने यह बातें सोशल मीडिया अकाउंट को आधार से लिंक करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कही. इस मामले पर जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच सुनवाई कर रही है. सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा कि इस मामले पर न सुप्रीम कोर्ट और न ही हाईकोर्ट फैसला दे सकता है. सरकार और आईटी विभाग इसे देखे और समस्या का हल तलाशे.  पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सूचित करने के लिए कहा था कि क्या वह सोशल मीडिया को विनियमित करने के लिए कुछ नीति तैयार करने और आधार के साथ सोशल मीडिया खातों को जोड़ने के लिए कोई भी कदम उठाने पर विचार कर रही है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग खतरनाक हो गया है. समय आ गया है कि केंद्र सरकार इसमें दखल दे. मामले की सुनवाई के दौरान जिस्टस गुप्ता ने कहा कि आखिर किसी उपयोगकर्ता को सर्विस प्रोवाइडर से यह पूछने का हक क्यों नहीं है कि मैसेज कहां से शुरू हुआ. हमें इंटनेट की चिंता आखिर क्यों नहीं करनी चाहिए. मुझे लगता है कि हमें देश की चिंता करनी चाहिए और अगर ऐसा है तो आज के दौर में हमारे पास सोशल मीडिया को लेकर कड़े नियम बनाए जाने चाहिए. हमें लगता है कि हर किसी की निजता का संरक्षण करना चाहिए. जस्टिस गुप्ता ने सुवनाई के दौरान सवाल किया कि कोई मुझे ऑनलाइन ट्रोल करने और मेरे चरित्र के बारे में झूठ फैलाने में सक्षम क्यों हो, अगर सरकार अपने मामलों में निपट सकती है तो फिर किसी नागरिक को लेकर उसके पास क्या उपाय हैं. केंद्र सरकार के लिए सुप्रीम कोर्ट के सवालों के जवाब को तलाशने की चुनौती तो है. लेकिन सरकार पर भी सवाल उठते रहे हैं और सरकार में शामिल मंत्रियों को तो जाने दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पर आरोप लगे हैं कि वे उन्हें ट्विटर पर फॉला करते हैं, जो दूसरों को गाली देते हैं और ट्रोल करते हैं. '' (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).

The post सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- लोगों की निजता का संरक्षण करे सरकार appeared first on Fashion NewsEra.

Related News

Leave a Comment