इंडिगो के नियंत्रण में बदलाव पर भाटिया के सहमत होने की संभावना नहीं

नई दिल्ली, 14 जुलाई (आईएएनएस)। नाराज प्रमोटर के पत्र से पैदा हुए विवाद के बावजूद इंडिगो के को-प्रमोटर राहुल भाटिया अपने रुख से हिलने वाले नहीं हैं और इस बात की संभावना नहीं दिख रही कि वह एयरलाइन के नियंत्रण में बदलाव को लेकर सहमत होंगे जिसके तहत उनको चेयरमैन, सीईओ और अन्य प्रबंधन अधिकारियों को नामित करने का अधिकार मिला हुआ है।

सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि भाटिया किसी सरकारी एजेंसी से कंपनी की बही की जांच करवाने को लेकर तैयार थे क्योंकि कंपनी के नरिजए से इसकी कार्यप्रणाली में कोई कमी नहीं है।

एग्जिक्यूटिव ने बताया, संबंधित पक्ष हस्तांतरण (आरपीटी) और कॉरपोरेट नियंत्रण से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। इस बहाने एक प्रमोटर नियंत्रण में बदलाव चाहता है। लेकिन राहुल भाटिया ऐसा नहीं करने जा रहे हैं।

एयरलाइन के दो सह-संस्थापक राकेश गंगवाल और भाटिया के बीच टकराव आठ जून को तब प्रकाश में आया जब गंगवाल ने आरपीटी और कॉरपोरेट नियंत्रण के मुद्दों को लेकर बाजार विनियामक सेबी (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) को पत्र लिखा।

पत्र की एक प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और शीर्ष स्तर के सरकारी अधिकारियों को भेजी गई।

कंपनी में गंगवाल और उनके परिवार की 37 फीसदी हिस्सेदारी है जबकि भाटिया और उनके परिवार के पास देश की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की एयरलाइन कंपनी में 38 फीसदी हिस्सेदारी है और करीब 50 फीसदी शेयर देश में लोगों के पास है।

गंगवाल ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि कंपनी द्वारा नियंत्रण के आधारभूत नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने आरपीटी को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि अगर त्रुटियों को दूर नहीं किया गया तो इसके दुर्भाग्यपूर्ण अंजाम देखने को मिलेंगे।

बताया गया है कि भाटिया के पास इंडिगो में असामान्य अधिकार है जिसके तहत वह छह में से तीन निदेशकों की नियुक्ति कर सकते हैं। इसके अलावा वह एमडी, सीईओ व प्रेसिडेंट की नियुक्ति कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन अधिकारों का उपयोग उचित ढंग से नहीं किया जा रहा है।

--आईएएनएस



Source : ians

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