जालान समिति ने दिया 3-5 साल के दौरान किस्तों निधि हस्तांतरण का सुझाव

नई दिल्ली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। विमल जालान समिति ने भारतीय रिजर्व बैंक (आबीआई) के पूंजी अधिशेष पर बुधवार को अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप प्रदान करते हुए तीन से पांच साल के दौरान किस्तों में अधिशेष का हस्तांतरण सरकार को किए जाने की सिफारिश की।

हालांकि हस्तांतरण राशि पर समिति में सर्वसम्मति नहीं बन पाई।

सूत्रों ने बताया कि हर चक्र के बाद समय-समय पर आर्थिक पूंजी फ्रेमवर्क (ईसीएफ) की समीक्षा की जाएगी।

हालांकि रिपोर्ट पर सर्वसम्मति नहीं बन पाई है लेकिन अंतिम रिपोर्ट 10 दिनों में आरबीआई को सौंपी जाएगी और समिति की सिफारिश में मतभेद शामिल किया जा सकता है।

निधि हस्तांतरण की राशि पर सुझाव का खुलासा नहीं किया गया है क्योंकि सुझाव अभी सौंपा नहीं गया है।

सूत्रों ने बताया कि सरकार के सदस्य वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग की ओर से असहमति जाहिर की गई है क्योंकि उनका मानना है कि समिति की सिफारिश से अधिक अधिशेष राशि सरकार को हस्तांतरित की जानी चाहिए।

छह सदस्यीय विमल जालान समिति का गठन पिछले साल दिसंबर में किया गया था। समिति को आरबीआई की आरक्षित पूंजी निधि की समीक्षा करने का दायित्व सौंपा गया था।

आरबीआई के पास 9.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक पूंजी अधिशेष है।

इस समिति का गठन ऐसे समय में किया गया था जब आरबीआई और सरकार के बीच केंद्रीय बैंक के अधिशेष के हस्तांतरण को लेकर मतभेद उभर कर आया था।

--आईएएनएस

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