ड्रेसिंग रूम में बाधाओं को तोड़ना कोच रॉकी के लिए अहम

नई दिल्ली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय महिला फुटबाल टीम की कोच मेयमोल रॉकी का मानना है कि भारत में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व से टीम के ड्रेसिंग रूम का माहौल बदल रहा है।

मेयमोल ने आईएएनएस से कहा, पहले पूर्वोत्तर से काफी लड़कियां राष्ट्रीय टीम में जगह बनाती थी, लेकिन अब हमेशा दो से तीन रहती हैं।

कोच का मानना है कि उनके लिए बाधाओं को तोड़ना काफी अहम है।

उन्होंने कहा, टीम का मुख्य कोच होने के नाते मैं प्रत्येक खिलाड़ी और उनकी पृष्ठभूमि को जानती हूं। उनकी संस्कृति और भाषा अलग होती है। इसलिए मैं उन्हें सुविधाजनक माहौल देने की कोशिश करती हूं। कुछ लड़कियां ऐसा नहीं करना चाहती है, लेकिन एक अच्छी टीम होने के लिए आपको कुछ चीजों को तोड़ने की जरूरत है।

मेयमोल हाल में महिला फीफा विश्व कप के कुछ मैचों को देखने के लिए फ्रांस गई थीं।

उन्होंेन कहा, फीफा के माध्यम से मुझे वहां जाने का मौका मिला, इसलिए लड़कियां मुझसे कहने लगी कि आप हमें क्यों नहीं ले गई।

हालांकि उन्होंने अपने खिलाड़ियों के साथ सेमीफाइनल और फाइनल के मैच देखे थे।

मेयमोल ने कहा, इन लड़कियों के साथ मैचों का आनंद लेना काफी शानदार था। अधिकतर लड़कियां अमेरिका का समर्थन कर रही थी जबकि कुछ इंग्लैंड का भी।

भारतीय टीम अब इस महीने के आखिर में स्पेन में कोटिफ कप में भाग लेगी।

मेयमोल ने इस टूर्नामेंट को लेकर कहा, हम अपनी ताकत और फिटनेस पर काम कर रहे हैं। यह मुश्किल है, लेकिन लड़कियां इसे करती हैं। इस युवा टीम की यही एक खासियत है।

उन्होंने कहा, पिछले चार महीने से हम आक्रामक खेल और गोल करने पर ध्यान दे रहे हैं। लेकिन अब मैं डिफेंस पर भी ध्यान दे रही हूं क्योंकि हमें यूरोपियन टीमों के खिलाफ खेलना है।

कोच ने कहा, रोमानिया के खिलाफ हम 0-3 से मैच हार गए, लेकिन ये तीनों गोल मैच के पहले हाफ में हुए थे। दूसरे हाफ में लड़कियों ने जरा सी भी ढिलाई नहीं बरती थी। यहां तक कि रोमानियाई कोच ने भी मुझसे पूछा कि मैंने हाफ टाइम के दौरान लड़कियों को क्या बताया था।

--आईएएनएस

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