अयोध्या मुद्दे पर मध्यस्थता समिति नहीं चाहता राज जन्म भूमि न्यास

लखनऊ, 18 जुलाई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अयोध्या विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए गठित की गई मध्यस्थता समिति पर राम जन्मभूमि न्यास ने असहमति जताई है। न्यास की ओर से गुरुवार को कहा गया कि इस तरह की समिति की बिलकुल भी जरूरत नहीं थी क्योंकि भगवान राम का जन्म कहां हुआ था, इस बारे में कोई विवाद नहीं है।

न्यास के एक वरिष्ठ सदस्य महंत कमल नयन दास ने कहा कि मंदिर अयोध्या में बनाया जाएगा। इसके लिए या तो अदालत अनुमति देगी या फिर संसद द्वारा इसके लिए एक कानून लाया जाएगा।

दास ने आईएएनएस से कहा, हम हमेशा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए गठित तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल के खिलाफ थे। वास्तव में भगवान राम का जन्म कहां हुआ था, इस पर कोई विवाद नहीं है। दुनिया जानती है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था और यहां एक मंदिर का निर्माण होना चाहिए।

विवादित स्थल की कमान संभालने और राम मंदिर के निर्माण की देखरेख करने के लिए विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों द्वारा एक स्वतंत्र ट्रस्ट के रूप में 25 जनवरी, 1993 को न्यास की स्थापना की गई थी।

दास ने कहा, हम चाहते हैं कि अदालत मामले की सुनवाई के दौरान तथ्यों के आधार पर अपना फैसला दे।

उन्होंने कहा, सभी राजनीतिक दल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से यहां एक मंदिर के पक्ष में हैं। किसी भी राजनीतिक दल ने मंदिर का विरोध नहीं किया है, क्योंकि करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं इस मुद्दे से जुड़ी हुई हैं।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने आठ मार्च को मध्यस्थों के पैनल का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एफ. एम. खलीफुल्ला कर रहे हैं।

पैनल ने सात मई को एक सीलबंद लिफाफे में अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसके बाद समिति के अनुरोध पर सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के लिए 15 अगस्त तक का समय दिया।

संविधान पीठ ने 11 जुलाई को मध्यस्थता पैनल को 18 जुलाई तक एक स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा था। इसके बाद अब गुरुवार को शीर्ष अदालत ने पैनल को मध्यस्थता के लिए कुछ और समय देते हुए एक अगस्त तक रिपोर्ट देने को कहा है।

अदालत ने आगे की कार्रवाई पर फैसला करने के लिए सुनवाई की अगली तारीख दो अगस्त तय की है।

--आईएएनएस

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