योगी को उप्र में क्यों कहा जाता है एनकाउंटर मैन?

लखनऊ, 22 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की कमान संभालने के एक महीने बाद जब सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह घोषणा की थी, अगर अपराध करोगे तो ठोक दिए जाएंगे, शायद इसे कुछ लोगों ने गंभीरता से ले लिया है।

पिछले तीन दशकों में, राज्य में अपराध और राजनीति अविभाज्य हो गई थी और अपराधियों के नेताओं के साथ संबंध केवल मजबूत हुए।

जनवरी में योगी ने गर्व से पत्रकारों को बताया था कि उनके कार्यकाल में तीन हजार के करीब एनकाउंटर हुए हैं, जिनमें 69 अपराधियों को पुलिस ने मार गिराया, मुठभेड़ में 838 घायल हुए और 7,043 को गिरफ्तार किया गया।

इसके अलावा सरकार के दो साल पूरा करने के दौरान 11,981 अपराधियों ने अपनी जमानत रद्द करवाई और कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण किया।

लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री की ठोको नीति का विपक्ष ने खूब मजाक बनाया, लेकिन आलोचकों की बात से योगी को कोई असर नहीं हुआ।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओ.पी. सिंह ने कहा, ऊपर से आदेश दिए गए थे कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाए। पुलिस बल पर किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव नहीं है। संगठित अपराधों में कमी आई है। यहां तक की हत्याओं के मामलों में भी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अपराध कम होने का एक अन्य कारण नोटबंदी भी रहा है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, नोटबंदी के बाद नकदी के आदान-प्रदान में कमी देखने को मिली और अंडरवर्ल्ड का पैसा चेक और ड्राफ्ट में नहीं आता है, जिसके बाद से सूबे में अपराध में कमी देखने को मिली।

आला अधिकारियों ने पुलिस के मामले में किसी प्रकार से हस्तक्षेप नहीं करने के कारण योगी सरकार को पूरे नंबर दिए हैं।

अधिकारी ने कहा, एक मामले में जाने माने अपराधी को गिरफ्तार किया गया और भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने हमें आरोपी पर लगे आरोपों को कम करने को कहा ताकि उसे जमानत मिल सके। हमने मुख्यमंत्री को सूचित किया और उन्होंने हमें नेता की बात को नजरअंदाज करने को कहा। इसका परिणाम यह है कि अपराधी अभी भी जेल में है और उसकी जमानत दो बार खारिज हो चुकी है।

हालांकि, मुख्यमंत्री की एनकाउंटर नीति भी प्रश्न खड़े करती है।

पिछले साल एक समाचर पोर्टल ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि उत्तर प्रदेश के 14 एनकाउंटर पहले से ही योजनाबद्ध तरीके से किए गए।

--आईएएनएस

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