एनजीओ का दावा, गोवा रेप पीड़िता का भी उन्नाव जैसा उत्पीड़न

पणजी, 3 अगस्त (आईएएनएस)। महिला अधिकार के लिए लड़ने वाली गोवा की सबसे पुरानी गैर-सरकारी संगठनों में से एक बैलांचो साद ने आरोप लगाया है कि उन्नाव जैसा ही उत्पीड़न पुलिस ने एक रेप पीड़िता के साथ किया है।

इस पीड़िता ने शनिवार को यह दावा किया कि उसे इस सप्ताह की शुरुआत में उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब वह पहले जारी किए गए समन के बारे में पूछताछ के लिए एक पुलिस स्टेशन गई।

पीड़िता के इस दावे के बाद ही एनजीओ ने यह आरोप लगाया।

संस्था की संयोजक सबीना मार्टिन्स ने यहां कहा, हम गोवा में अधिकारियों को शिकायतकर्ता के साथ उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की तरह बर्ताव करने की अनुमति नहीं दे सकते हैं।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीड़िता भी मौजूद थी।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब वह पुलिस द्वारा उसे जारी किए समन के बारे में पूछताछ करने के लिए उत्तरी गोवा में मापुसा पुलिस स्टेशन गई तो मौखिक रूप से उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उसे लात मारी गई।

पीड़िता ने कहा, मैं नहीं जानती थी कि समन किस बारे में था इसलिए मैं वहां गई, लेकिन मुझे गाली दी गई और खींचकर पुलिस लॉक-अप में बंद कर दिया गया। मुझे न तो मेरी बेटी संग बात करने की अनुमति नहीं दी गई और न ही मुझे अस्थमा की दवाई दी गई। मुझे अस्थमा पंप चाहिए था और उन पर दबाव बनाने के लिए लॉकअप के अंदर ही विरोधस्वरूप मुझे अपने कपड़े उतारने पड़े।

मापुसा पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के अनुसार, पीड़िता के साथ साल 2018 में दुष्कर्म किया गया। आरोपी अभी जमानत पर रिहा है। समन आपराधिक मामले के चलते जारी किया गया था।

पुलिस के शीर्ष अधिकारी इस पर टिप्पणी करने के लिए उपलब्ध नहीं थे। हालांकि उत्तरी गोवा जिला पुलिस से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, रेप पीड़िता को धारा 506 (आपराधिक धमकी) और धारा 353 (सरकारी अधिकारी को कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने के लिए) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस अधिकारी ने कहा, जब वह थाने गई तो हिंसक व्यवहार कर रही थी और हमारे अफसरों संग बातचीत को रिकॉर्ड करने की कोशिश कर रही थी और उसने उन्हें धमकी भी दी।

--आईएएनएस

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