मैं सीता को पितृसत्ता की पीड़ित के रूप में नहीं देखती : शिव्या

शिव्या ने आईएएनएस को बताया, एक व्यक्ति के रूप में मैं लैंगिक बराबरी में भरोसा करती हूं, जो कि मुख्यत: किसी के द्वारा अपनी पसंद को चुनने की आजादी है। इसलिए मैं सीता को पितृसत्ता की पीड़ित के रूप में नहीं देखती। हमने इस शो में इस चरित्र को आधुनिक परिदृश्य में चित्रित किया है।

शिव्या ने कहा कि पहले उन्हें लगा कि सीता दूसरी बार बनवास में क्यों गई, जिससे उनकी परिवार की खुशियां प्रभावित हुई।

शिव्या ने कहा, उसके बाद मैंने दूसरे परिपेक्ष्य को समझने की कोशिश की। उन्होंने खुद राम के साथ 14 साल के बनवास को चुना था। अगर सीता ने राम की पत्नी के नाते साथ जाना चुना तो यह चुनाव खुद उनका था। अयोध्या लौटने के बाद राम ने उनके चरित्र पर कभी सवाल नहीं उठाया, लेकिन इस समाज ने सवाल उठाया। चूंकि सीता एक रानी थी और अपनी प्रजा से प्यार करती थी, इसलिए उन्होंने उदाहरण स्थापित करने का फैसला किया और राजघराने की इज्जत वापस लौटाई। यही कारण है कि उन्होंने दूसरी बार बनवास जाना चुना।

शिव्या अभिनय की दुनिया में आने से पहले साल 2013 में मिस शिमला चुनी गई थीं।

उनका कहना है, हम राम और सीता की इसलिए पूजा नहीं करते, क्योंकि वे अयोध्या के राजा और रानी थे, बल्कि एक व्यक्ति के रूप में उनकी महानता और अपनी प्रजा के लिए किए गए बलिदान के कारण उनकी पूजा की जाती है। हम उनकी नैतिकता और असाधारण व्यक्तिव को प्राप्त करना चाहते हैं।

राम सिया के लव कुश में कृष चौहान और हर्षित काबरा ने लव और कुश की भूमिका निभाई है, जबकि शिव्या और हिमांशु सोनी सीता और राम की भूमिका में हैं।

--आईएएनएस

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