हिमा को चने की झाड़ पर चढ़ाने से किसी का भला नहीं होगा : रंधावा

नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। गुरबचन सिंह रंधावा उस समय के खिलाड़ी हैं जब पदक जीतना एथलीट को सम्मान दिलाता था लेकिन यह वक्त था, तब वित्तीय फायदे बेहद कम थे। रंधावा ने 1962 में एशियाई खेलों में पदक जीता था और वह 1961 में अर्जुन अवार्ड जीतने वाले पहले खिलाड़ी थे।

अपने समय और आज के समय की तुलना करते हुए रंधावा ने आईएएनएस से कहा, मैं जब प्रतियोगिताओं में जाता था तब मुझे अपने सभी खचरे को देखना होता था। मैं इसके लिए किसी को दोष नहीं देता। उस समय हमारे पास इंफ्रस्ट्रग्चर नहीं था। तब तो खेल मंत्रालय भी नहीं हुआ करता था।

उन्होंने हालांकि मौजूदा स्थिति को सकारात्मक बताया लेकिन साथ ही सावधानी बरतने को कहा है, अब चीजें काफी हद बेहतर हुई हैं, लेकिन अभी भी हमें विश्व स्तर तक पहुंचने के लिए काफी कुछ करना है।

रंधावा ने कहा कि जीत पर एथलीट की सराहना करना सही है लेकिन ऐसे टूर्नामेंट्स में जीत हासिल करना जो ज्यादा अहम नहीं हैं उनमें जीत पर खिलाड़ियों को चने के झााड़ पर चढ़ा देने से सभी को बचना चाहिए। ऐसा मामला एथलीट हिमा दास को लेकर हुआ था। जिन्होंने बीते महीने यूरोप में पांच पदक अपने नाम किए थे और सोशल मीडिया पर राजनेता, सेलिब्रिटी, सभी वर्ग के लोगों ने उनकी सराहना की थी।

सच्चाई हालांकि यह है कि वह सभी बहुत निचले स्तर के टूर्नामेंट्स थे। उन टूर्नामेंट्स में हिमा ने इसलिए हिस्सा लिया था ताकि वह एशियन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में लगी चोट के बाद अपनी लय हासिल कर सकें।

उन्होंने कहा, इन टूर्नामेंट्स का कोई खास स्तर नहीं था। इस तरह की गैरजरूरी हाइप खिलाड़ियों के लिए अच्छी नहीं है।

80 साल के रंधावा ने हालांकि कहा है कि पदक जीतना या इनकी कमी होना खिलाड़ी की सफलता का पैमाना नहीं बन सकते।

उन्होंने कहा, खिलाड़ी पदक जीतें या हरे उस स्तर तक पहुंचने में काफी कुछ लगता है। उसे भी गिना जाना चाहिए।

रंधावा ने कहा कि टोक्यो ओलम्पिक को लेकर अधिकारियों ने इस मामले में काफी कुछ किया है।

उन्होंने कहा, खिलाड़ियों को सुविधाएं दी गई हैं। इसमें कोई शक नहीं है। उनके पास अच्छे कोच भी हैं और किसी भी तरह के पेमैंट में देरी नहीं हो रही है। सही दिशा में कई तरह के निवेश किए गए हैं।

रंधावा को हालांकि लगता है कि भारत को ट्रैक एंड फील्ड में बड़ी सफलता हासिल करने के लिए काफी कुछ करना है।

भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने 2018 में आयोजित किए गए राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन किया था और उन्हें टोक्यो ओलम्पिक-2020 में पदक का दावेदार माना जा रहा था लेकिन कोहनी की चोट ने उनकी प्रगति को रोक दिया।

नीरज को लेकर रंधावा ने कहा, कोहनी की चोट से वापसी करना और फिर उस स्तर पर दोबारा पहुंचाना जिस स्तर पर वो थे, आसान नहीं होता है। मैं उनकी प्रगति से काफी खुश हूं। लेकिन हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा कि वह किस तरह से रिकवर कर रहे हैं।

रंधावा ने कहा, रियो ओलम्पिक के बाद बैडमिंटन, टेनिस, निशानेबाजी ऐसे खेल हैं जिन्होंने अच्छी प्रगति दिखाई है। एथलीट में अब हम देख सकते हैं कि अलग-अलग स्पर्धाओं में खिलाड़ियों को अच्छी तरह से बांटा गया है। पहले यह होता था कि कुछ स्पर्धाओं के लिए हमारे पास अच्छे खिलाड़ी नहीं होते थे, लेकिन अब ऐसा मामला नहीं है। हालांकि मुझे नहीं लगता कि अभी तक हमारे पास विश्व स्तरीय खिलाड़ी हैं।

--आईएएनएस

Related News

Leave a Comment