सुप्रीम कोर्ट ने किया सवाल, क्या जन्मस्थान विधिक व्यक्ति हो सकता है?

नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद मामले की सुनवाई के तीसरे दिने गुरुवार को रामलला विराजमान के वकील से पूछा कि क्या न्याय प्रशासन के संबंध में जन्मस्थान को विधिक व्यक्ति माना जा सकता है।

मामले की सुनवाई कर रही संविधान पीठ के पांच न्यायाधीशों में शामिल न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ ने कहा कि रामलला विराजमान के वकील की दलील में कहा गया है कि जन्मस्थान विधिक व्यक्ति है क्योंकि यह पूजा की वस्तु है।

न्यायाधीश ने रामलला विराजमान के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता के. पराशरण से पूछा, लेकिन पूजा का स्रोत क्या है?

पीठ के अन्य न्यायाधीश ने सवालिया लहजे में कहा, जन्मस्थान विधिक व्यक्ति कैसे हो सकता है?

पीठ ने यह स्पष्ट जानना चाहा कि क्या जन्मस्थान की पूजा इस विश्वास से की जाती है कि भगवान राम का वहां जन्म हुआ था।

पीठ ने पूछा, तो क्या पूजा का स्रोत यह निर्णय करने के लिए बेंचमार्क हो सकता है कि वह विधिक व्यक्ति है।

जन्मस्थान को कानूनी व्यक्ति के रूप में प्रयोग किए जाने के महत्व को प्रतिपादित करते हुए पराशरण ने कहा कि क्या देवता की उपस्थिति ही मात्र विधिक व्यक्ति होने का परीक्षण नहीं है।

उन्होंने कहा, नदियों की पूजा की जाती है और उन्हें देवी-देवता के रूप में माना जाता है। ऋग्वेद के अनुसार, सूर्य देवता है। सूर्य प्रतिमा नहीं है लेकिन देवता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि सूर्य विधिक व्यक्ति है।

--आईएएनएस

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