देश में 2100 तक कमजोर हो सकता है मानसून : आईआईटी मंडी

मंडी, 8 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मंडी के शोधार्थियों ने भारत में 100 साल के मानसून के दौरान बारिश के आंकड़ों से एक अल्गोरिद्म (कलन विधि) तैयार करके भविष्यवाणी की है कि 2021 तक देश में मानसून की गतिविधि कमजोर हो सकती है।

अल्गोरिद्म से वैश्विक जलवायु की गतिविधि मसलन अलनीनो दक्षिणी स्पंदन के संबंध में भी सूचना का विश्लेषण किया जाएगा और मजबूत और कमजोर मानसून के वर्षो के बीच के कालचक्र का विश्लेषण किया जा सकता है।

स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज की असिस्टेंट प्रोफेसर सरिता आजाद की अगुवाई में यह शोध किया गया है। इस कार्य में उनके सहयोगी शोधार्थी प्रवत जेना, सौरभ गर्ग और निखिल राघा हैं।

उन्होंने मानसूनी बारिश के कालचक्र में परिवर्तन का अध्ययन करके आंकड़ों का प्रयोग भविष्य के कालचक्र की भविष्यवाणी के लिए किया है।

उनका यह शोधकार्य हाल ही में प्रतिष्ठित अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन के पीयर-रिव्यू इंटरनेशनल जर्नल अर्थ एंड स्पेस साइंस में प्रकाशित हुआ है।

भारत के ग्रीष्मकालीन मानूसन और सालाना पवन चक्र के साथ-साथ बारिश का मजबूत चक्र बेशक देश की जीवन-रेखा है।

आजाद और उनकी टीम ने अल्गोरिद्म तैयार किया है जिससे बारिश की सही-सही तीव्रता का पता लगाया जा सकता है।

आजाद ने कहा, हमने पाया कि भारत के ग्रीष्मकालीन मानसून के दौरान बारिश का कालचक्र 2.85 साल का है। इस दौरान मानसून मजबूत और कमजोर वर्षो के बीच बदलता रहता है। इसे त्रिवार्षिक स्पंदन या दोलन करते हैं।

पूर्वानुमान में इस दोलन के 2100 तक कमजोर होने के बारे में बताया गया है।

--आईएएनएस

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