दशक-80 का बॉलीवुड जिंदा करने वाली दमदार कहानी है प्रणाम

मुंबई, 9 अगस्त (आईएएनएस)। निर्देशक संजीव जायसवाल की फिल्म प्रणाम 80 के दशक में आई बॉलीवुड की कुछ बेहतरीन फिल्मों की याद दिलाती है। ऐसी फिल्में लंबे समय से देखने को नहीं मिल रही थी, जिनमें हीरो किसी बदली परिस्थिति के कारण बदले की आग में विलेन बन जाता है।

फिल्म की कहानी ऐसी है जो दर्शकों को हर मोड़ पर एक खास एहसास दिलाए। अगर आप लंबे समय से बेहतरीन कहानी से लबरेज किसी ऐसी ही फिल्म का इंतजार कर रहे हैं तो यकीन मानिए निर्देशक संजीव जायसवाल की फिल्म प्रणाम का सब्जेक्ट आपके दिल को छू जाएगा।

फिल्म की कहानी में लखनऊ का लड़का अजय सिंह (राजीव खंडेलवाल) भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अफसर बनने की तैयारी कर रहा है। उसके पिता दीनानाथ (एसएम जहीर) चपरासी हैं, लेकिन वह पार्ट टाइम के तौर पर होटल में भी काम करते हैं, ताकि बेटे को अच्छी शिक्षा मुहैया करा सकें। अजय सिंह के साथ ही आईएएस की तैयारी करने वाली अमीर घर की लड़की मंजरी शुक्ला (समीक्षा सिंह) अजय से प्यार करती है।

उनके शहर में गुंडा राज चरम सीमा पर है। शहर के जाने माने गुंडे गनु भैया (अभिमन्यु सिंह) राजनीति के साथ-साथ गुंडागर्दी व दबंगई भी खूब करते हैं। वह अपने बल का प्रयोग कर पेपर लीक करा देते हैं। वो इस पेपर लीक कांड में विश्वविद्यालय के ईमानदार प्रोफेसर व मंजरी के पिता तेज प्रताप सिंह (विक्रम गोखले) को फंसा देते हैं। लेकिन हालात कुछ ऐसे बनते हैं कि तेज प्रताप की बेटी को गनु भैया के गुंडों से बचाने के चक्कर में अजय सिंह के हाथों गनु भैया का कत्ल हो जाता है।

इसके बाद मामले की जांच इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर व पैसों के नशे में चूर भ्रष्ट अधिकारी राजपाल सिंह (अतुल कुलकर्णी) करते हैं। अपनी कार्रवाई में वो कत्ल ही नहीं बल्कि पेपर लीक का जिम्मेदार अजय सिंह को बना देते हैं। इसके बाद अजय पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है और बदला लेने के लिए वो आईएएस बनने का सपना छोड़ गैंगस्टर बनने पर मजबूर हो जाता है।

निर्देशक संजीव जायसवाल ने फिल्म प्रणाम में अस्सी के दशक में बनने वाली फिल्मों का तड़का लगाया है। फिल्म के हर दृश्य में आपको प्यार, लक्ष्य, संघर्ष व समझौते के साथ ही बदले की कहानी दिखाई देगी। फिल्म का संगीत काफी अच्छा है। वहीं बीच-बीच में शामिल किए गए गाने फिल्म के हर दृश्य को खूबसूरती देते हैं।

कलाकारों की अदाकारी के बारे में बात करें तो राजीव खंडेलवाल (अजय सिंह) ने अपने पात्र के साथ सही मायने में न्याय किया है। फिल्म में गैंगस्टर और एक छात्र के किरदारों के साथ उन्होंने बेहतरीन अभिनय किया है। मंजरी की भूमिका में दिखीं समीक्षा सिंह की एक्टिंग फिल्म में जान डाल रही है। वहीं फिल्म में अभिमन्यु सिंह, अतुल कुलकर्णी, विक्रम गोखले ए. एस. एम. जहीर और अनिरुद्ध दवे जैसे कलाकार काफी सहज दिखे हैं और सभी ने अपने पात्रों को बखूबी निभाया है।

फिल्म क्यों देखें : लंबे समय से अगर कोई क्लासिक एक्शन से भरपूर फिल्म नहीं देखी है, तो प्रणाम जरूर देखें। यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।

स्टार : 4/5

--आईएएनएस



Source : ians

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