उप्र में नदियों के जलस्तर के साथ बढ़ रहीं लोगों की मुश्किलें

लखनऊ, 10 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में नदियों के जलस्तर घटने-बढ़ने के कारण लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। घाघरा, गंगा के जलस्तर बढ़ने से लोगों के घरों में पानी भर गया है। कटान से मार्ग भी डूब गए हैं।

नेपाल से छोड़े गए पानी ने घाघरा के जलस्तर को काफी बढ़ा दिया है। इसकी चपेट में बहराइच और बाराबंकी के कई गांव आ गए हैं। वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और बलिया जिलों से होकर बहने वाली गंगा नदी में पानी लगातार बढ़ने से लोग चिंतित हैं।

गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों का संपर्क टूट गया है। साथ ही शवदाह का स्थल भी बदलना पड़ गया है। मणिकर्णिका घाट पर छतों पर शवदाह किया गया। हरिश्चंद्र घाट पर भी शवदाह सीढ़ियों पर हो रहा है।

मणिकर्णिका घाट के शवदाह प्लेटफार्म पर पानी भर गया है। लिहाजा अब शवदाह श्मशान नाथ महादेव मंदिर के बगल में और छत के ऊपर किए जाने लगे हैं। इससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए एनडीआरएफ की टीम घाटों के किनारे अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।

बनारस के लोगों का कहना है कि अभी तो पानी ठहरा हुआ है। रात में अचानक बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि अगर पानी तीन-चार सेमी बढ़ा तो हरिश्चंद्र घाट की गलियों में शवदाह करना पड़ेगा।

हरिश्चन्द्र घाट के बगल में रहने वाले अनुराग का कहना है, पानी रोज घट बढ़ रहा है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है। घाटों में पानी की अधिकता को देखते हुए नाविकों को नदी में जाने से मना कर दिया गया है।

यहीं के पप्पू चौरसिया का कहना है, जलस्तर बढ़ने से शवों को ऊपर जलाना पड़ रहा है। रात से ही जलस्तर बढ़ा देखा जा रहा है। अभी भी वही स्थिति है।

पहाड़ों पर हो रही बारिश के कारण गंगा के जलस्तर में पिछले छह दिनों से वृद्धि हो रही है। पिछले 24 घंटों में गंगा के जलस्तर में 24 सेमी वृद्धि दर्ज की गई। अब गंगा सामान्य जलस्तर 58.50 मीटर से पांच मीटर ऊपर बह रही है। इसके चलते दशाश्वमेध और शीतला घाट पर होने वाली आरती का स्थल बदल दिया गया है। एक-दूसरे से जुड़े अधिकतर घाटों का आपसी संपर्क भी टूट गया है।

बाराबंकी में घाघरा नदी का जलस्तर कम होने लगा, लेकिन इससे ग्रामीणों की परेशानी कम होती नहीं दिख रही। कंचनापुर के तीन घर नदी की धारा में बह गए। ऐसे ही हालात कई अन्य गांवों में हैं। लोगों ने तेजी से अपने घर छोड़ने शुरू कर दिए हैं।

सात गांवों को जोड़ने वाला मार्ग नदी की धारा में बह गया है। गांव टापू बनते जा रहे हैं। ग्रामीणों को बाहर निकलने के लिए नौका का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ प्रभावित टेपरा, बंधौली, पुरवा, गोबरहा, सरांय सुरजन, भौलीकोल और सनावां जाने वाले मुख्य मार्ग बह गए हैं। इससे लोग बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।

पानी बढ़ने से लोगों ने बांध पर डेरा डाल रखा है। बांध पर रह रहे लोगों की सुविधा के लिए बीती रात जनरेटर से रोशनी का इंतजाम करवाया गया। नगर पंचायत टिकैतनगर ने यहां एक सचल शौचालय भेजा है। इससे तराई वासियों को सहूलियत मिल रही है।

रामनगर के एसडीएम सी.पी. पाठक बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने लोगों की समस्या को देखते हुए हर प्रकार के इंतजाम करने को कहा है। वहीं नायब तहसीलदार गौरव सिंह ने नदी के उस पार बसे गांव माझा रायपुर पहुंचकर लोगों को तिरपाल व पन्नी वितरित किए।

बहराइच में घाघरा का पानी गांवों में घुस गया है। इससे ग्रामीण फंस गए हैं। मुख्य मार्गों पर पानी भरने के कारण आवागमन बाधित है। नौका लगाकर एसडीएम ने गांव के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने को कहा है।

गोण्डा में घाघरा नदी का जलस्तर कुछ घटा है, लेकिन नदी एल्गिन ब्रिज पर अब भी खतरे के निशान से 15 सेमी ऊपर बह रही है। गोण्डा के कैरनालगंज में लोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से नौका से ऊंचे स्थानों पर जाते दिखे। सरयू नदी भी खतरे के निशान से महज 10 सेमी दूर है।

सिंचाई एवं जल संसाधान विभाग के मुख्य अभियंता ए.के. सिंह ने बताया, आज का गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को लगभग पार कर गया है। गेजस्थल कचलब्रिज बदायूं से 162 सेमी बाढ़ के जलस्तर को पार करके 162.150 जलस्तर तक पहुंच गई है। घाघरा अभी स्थिर है। लेकिन नेपाल से छोड़ा गया पानी काफी दिक्कत पैदा कर रहा है। घाघरा अभी खतरे के निशान के करीब बह रही है। इसका खतरे का जलस्तर 92.730 है। वर्तमान में इसका जलस्तर 92.58 है।

बाढ़ राहत आपदा प्रबंधन विभाग कार्यालय के पदाधिकारियों ने बताया, अभी कुछ नदियों का जलस्तर घट-बढ़ रहा है। जिस जिले में बाढ़ और कटाव के हालात हैं, वहां के जिला प्रशासन को अलर्ट किया गया है। वहां के लोगों के लिए नौका की व्यवस्था के साथ खाने-पीने की भी व्यवस्था की जा रही है। कटान से बचाव के लिए भी कार्य किए जा रहे हैं।

--आईएएनएस

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