मंदी के दौर कैस्टरसीड बन सकती है किसानों की संजीवनी

नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा और बाजार में मंदी की मार झेल रहे किसानों के लिए इस साल कैस्टरसीड (अरंडी) की खेती संजीवनी बन सकती है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा कैस्टरसीड उत्पादक है और इस साल किसानों को कैस्टरसीड का अच्छा भाव मिलने के कारण इसकी खेती में उनकी दिलचस्पी बढ़ सकती है।

भारत के अलावा, चीन, ब्राजील और मोजांबिक व अन्य अफ्रीकी देशों में भी कैस्टर का उत्पादन होता है, मगर कैस्टर ऑयल की वैश्विक आपूर्ति में भारत का योगदान 85 से 90 फीसदी है।

जानकार बताते हैं कि पिछले साल कैस्टरसीड का उत्पादन कम रहने और मांग मजबूत रहने के कारण किसानों को अच्छा भाव मिला है।

कैस्टर ऑयल अखाद्य तेल है और इसका उपयोग औद्योगिक उद्देश्य से किया जाता है। खासतौर से इसका इस्तेमाल इंडस्ट्रियल लुब्रिकेंट और बायोडीजल कंपोनेंट के रूप में किया जाता है। इसके अलावा मेडिसिन और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में भी इसका इस्तेमाल होता है।

सॉल्वेंट एक्स्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक (ईडी) डॉ. बी. वी. मेहता ने बताया कि कैस्टर ऑयल की पूरी दुनिया में जबरदस्त मांग है और भारत के किसानों के लिए इसकी खेती काफी लाभकारी है, क्योंकि कैस्टर ऑयल के मामले में दुनिया के बाजारों में भारत की मोनोपोली है।

उन्होंने कहा कि इस बार कैस्टरसीड का किसानों को अच्छा भाव मिला है, जिससे इसकी खेती में उनकी दिलचस्पी बढ़ सकती है।

देश में सबसे ज्यादा कैस्टरसीड की पैदावार गुजरात में होती है। इसके बाद राजस्थान, तेलंगाना और अन्य प्रदेशों में भी इसकी खेती होती है।

डॉ. मेहता ने कहा, गुजरात और राजस्थान में इस साल अच्छी बारिश होने की वजह से कैस्टरसीड का रकबा 10 फीसदी तक बढ़ सकता है। साथ ही, इसकी उत्पादकता भी बढ़ सकती है।

हालांकि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी बुवाई के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में कैस्टरसीड का रकबा अब तक 1.89 लाख हेक्टेयर है, जोकि पिछले साल के 2.43 लाख हेक्टेयर से 0.53 लाख हेक्टेयर कम है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि तक औसत रकबा 3.13 लाख हेक्टेयर, जबकि पूरे सीजन के दौरान कैस्टरसीड का औसत रकबा 9.66 लाख हेक्टेयर रहता है।

इस पर डॉ. मेहता ने कहा कि अगस्त से 15 सितंबर तक कैस्टरसीड का पीक बुवाई सीजन रहता है, जोकि अभी शुरू ही हुआ है। उन्होंने कहा कि वैसे भी गुजरात में सभी खरीफ फसलों की बुआई के बाद जो खेत बच जाता है, उसमें किसान कैस्टर की ही फसल लगाते हैं।

देश के कैस्टरसीड बाजार विश्लेषक अहमदाबाद के मयूर मेहता ने कहा, पिछले साल के मुकाबले कैस्टरसीड के हाजिर भाव में 30-35 फीसदी की तेजी आई है, जिससे किसानों की दिलचस्पी आगे इसकी खेती में बढ़ सकती है।

एनसीडीएक्स की वेबसाइट के अनुसार, कैस्टरसीड के प्रमुख बाजार दिसा और कड़ी में शुक्रवार को कैस्टरसीड का भाव क्रमश: 5,611.45 रुपये और 5,6501 रुपये प्रति कुंटल था।

वहीं, एसईए की वेबसाइट के अनुसार, गुजरात में शुक्रवार को कैस्टरसीड का एक्स-मंडी रेट 55,900 प्रति टन था।

कृषि मंत्रालय द्वारा जून में जारी तीसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान के अनुसार, देश में कैस्टरसीड का उत्पादन 2018-19 में 119.8 लाख टन था, जोकि 2017-18 के उत्पादन 156.8 लाख टन से 37 लाख टन कम था।

--आईएएनएस

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