तिहाड़ में कैदियों को मोबाइल सप्लाई का सिंडिकेट तोड़ना चुनौती : डीजी (आईएएनएस विशेष)

वरिष्ठ आईपीएस अफसर गोयल ने आईएएनएस से खास बातचीत के दौरान कहा कि तिहाड़ के कैदियों को मोबाइल फोन सप्लाई करने वाले सिंडिकेट को तोड़ना अब उनके पुलिस-करियर की सबसे बड़ी चुनौती है।

पिछले महीने, 17 जुलाई को एशिया की सबसे बड़ी और सुरक्षित जेल के मुखिया की जिम्मेदारी संभालने के बाद डीजी (प्रिजन) संदीप गोयल ने माना कि जेल के भीतर जिस तरह मोबाइल फोन, खूंखार कैदियों के हाथ में पहुंच रहे हैं, यह एक चिंता का विषय है। मैं इस (मोबाइल) सिंडिकेट को जल्द ध्वस्त कर दूंगा।

भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 1989 बैच के अधिकारी गोयल ने कहा, इस सिलसिले में कुछ दिन पहले ही सभी 16 जेल के सुपरिंटेंडेंट के साथ मैंने बैठक की है। हमने एक बेहद ठोस रणनीति बनाई है जो कारगर साबित होगी। सुरक्षा की दृष्टि से, मैं बहुत सी बातें मीडिया से साझा नहीं कर सकता हूं, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि मोबाइल के खेल को अब पूरी तरह से नेस्तनाबूद किया जाएगा।

उन्होंने कहा, बतौर तिहाड़ जेल महानिदेशक मैं यहां के लिए नया हो सकता हूं, मगर जेल और इसकी कार्य-प्रणाली मेरे लिए नई नहीं है। मुझे उम्मीद है कि दिल्ली पुलिस में लंबे समय तक काम करने का अनुभव, तिहाड़ जेल में मेरे लिए बहुत काम आएगा।

उल्लेखनीय है कि उन्होंने तिहाड़ जेल महानिदेशालय परिसर में शुक्रवार (9 अगस्त) को दिल्ली के पश्चिमी जिला पुलिस अधिकारियों के साथ आपसी-सामंजस्य बैठक भी की।

उनसे जब पूछा गया कि तिहाड़ जैसी महत्वपूर्ण जेल का मुखिया बनने के बाद यहां सबसे बड़ी कौन सी कमी देखी तो उन्होंने कहा, यहां मोबाइल-सिंडिकेट एक बड़ी चुनौती है जिसे नेस्तनाबूद करना मेरी प्राथमिकता होगी। जेल के अंदर मोबाइल मिलना जितना गंभीर और चिंताजनक है, उससे ज्यादा हमें यह देखना होगा कि आखिर मोबाइल की पहुंच जेल की चार-दीवारी से दूर कैसे की जाए। इसके लिए मैंने एक ठोस योजना बनाई है, सुरक्षा कारणों से जिसका खुलासा करना यहां ठीक नहीं होगा।

बकौल संदीप गोयल, उनकी कोशिश यह भी होगी कि तिहाड़ और दिल्ली की अन्य जेलों में मौजूद जैमर सिस्टम को अपग्रेड किया जाए।

उन्होंने कहा, साथ ही, अत्याधुनिक जैमर की तादाद भी बढ़ाए जाने पर विचार कर रहा हूं। मौजूदा हालातों में मेटल-डिटेक्टर, सीसीटीवी कैमरों की संख्या में इजाफा भी वक्त की जरूरत है। सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाए जाने से जेलों में चल रहा मोबाइल का खेल भी बंद करने में मदद मिलेगी।

दिल्ली की अत्याधुनिक जेलों में से कुछ में गुलेल और गेंद की मदद से कैदियों तक मोबाइल पहुंचाए जाने के सवाल पर नव-नियुक्त जेल महानिदेशक ने कहा कि अपराधी शातिर दिमाग होता है, लेकिन इतना भी नहीं कि वो कानून पर हावी हो जाए। ज्वाइन करते ही मैं जेल में मोबाइल पहुंचाने की रोकथाम की रणनीति बना चुका हूं। रणनीति को आम किया जाना ठीक नहीं है।

कश्मीर से धारा-370 खत्म किए जाने के बाद तिहाड़ जेल के सुरक्षा-इंतजामों में कोई खास तब्दीली का सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा, नहीं कोई खास तब्दीली नहीं, हां, ऐसी कुछ वजहों के चलते हमें खुद को हाई-अलर्ट पर ले आना पड़ता है, ताकि चूक की कहीं कोई गुंजाईश न रहे।

धारा-370 हटाए जाने के बाद कश्मीर घाटी की जेलों से कितने, और कौन-कौन से खतरनाक कैदी तिहाड़ में हाल-फिलहाल शिफ्ट किए गए हैं? यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा, हाई-सिक्योरिटी वाले कैदियों की जेल शिफ्टिंग कोई नई बात नहीं है। जेल-सेवा में यह रोजमर्रा की प्रक्रिया है। हमारे पास भी घाटी के (कश्मीर) कई कैदी हैं, जिन्हें अलग-अलग जेलों के हाई-सिक्योरिटी वार्डस (तिहाड़, मंडोली और रोहिणी) में रखा गया है।

10 हजार कैदियों को बंद रखने की क्षमता वाली दिल्ली की 16 जेलों (तिहाड़, मंडोली, रोहिणी) में 17 हजार से ज्यादा कैदी गाजर-मूली की तरह ठूंसकर भरे गए हैं।

इस भीड़ के चलते ही जेल में अक्सर मादक पदार्थो की सप्लाई, कैदियों के बीच अक्सर छोटी-मोटी बातों पर खून-खराबे की खबरें आती रहती हैं। इस बाबत पूछे जाने पर जेल महानिदेशक ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में कुछ छिटपुट घटनाएं घट जाती हैं।

उन्होंने कहा, इन पर नियंत्रण फाइलों में नहीं, वास्तव में करने की कोशिश करूंगा, ताकि जेल का अनुशासन दांव पर न लगे।

जेल में कैदियों की बेतहाशा भीड़ की तुलना में, जेल सुरक्षा कर्मियों की कहीं ज्यादा कमी के बारे में पूछे जाने पर संदीप गोयल ने कहा कि दिल्ली राज्य अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के जरिये वार्डर और सहायक जेल-अधीक्षकों की भर्ती की जा रही है और जल्दी ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा।

तिहाड़ जेल महानिदेशक के मुताबिक, जेल कर्मचारियों के वैलफेयर का विषय, जिसके तहत 7वां पे-कमीशन दिलवाने का प्रयास करना भी उनकी प्राथमकिता होगी। उन्होंने कहा कि जेल में मादक पदार्थो की सप्लाई और किसी भी तरह की सेंधमारी को रोकने के लिए वह वचनबद्ध हैं।

--आईएएनएस

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