विरासत में प्राप्त विवादों के समाधान के लिए सरकार ने उठाया ठोस कदम

नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। अर्थव्यवस्था के लिए रोडमैप का निर्माण करते हुए केंद्र सरकार ने विवादों के भारी बोझ को कम करने के लिए ठोस कदम उठाया है।

केंद्र सरकार ने सबका विश्वास स्कीम (विरासत में प्राप्त विवादों का समाधान)-2019 से जुड़े 43 अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (एफएक्स) की एक सूची जारी की है जिसका मकसद कारोबारी सुगमता (इज ऑफ डूइंग बिजनेस) के अनुकूल माहौल का निर्माण करने से सीधे तौर पर जोड़कर स्कीम को सरल बनाना है।

एफएक्यू एक कोशिश है जिसमें पूछे गए सवालों का जवाब देकर विरासत में प्राप्त विवादों से जुड़े स्वाभाविक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। मसलन, घोषणा पत्र (ब्योरा) दाखिल करने का पात्र कौन है और स्कीम के तहत आने वाले अधिनियमों की सूची।

यह सूची केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) की वेबसाइट पर अपलोड की गई है।

एफएक्यू के तहत अधिकांश सवाल व्यक्ति की पात्रता और सेवा कर व केंद्रीय उत्पाद शुल्क के तहत आने वाले विवादों के समाधान पर केंद्रित हैं।

इस स्कीम के तहत पात्र व्यक्तियों को सीबीआईसी के पोर्ट पर इलेक्ट्रॉनिक घोषणा पत्र दाखिल करने की आवश्यकता है और घोषणा पत्र दाखिल करने के 60 दिनों के भीतर मसले पर लिए गए अंतिम निर्णय से संबंधित जवाब संबद्ध व्यक्ति को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दिया जाएगा।

यह स्कीम तीन महत्वपूर्ण पहलुओं पर केंद्रित है, जिनमें उद्योग के संसाधनों का अधिकतम उपयोग, लंबे समय तक विवाद को लंबित रखने और करदाताओं को सेवा कर और केंद्रीय उत्पाद शुल्क से संबंधित उनके मसलों का समाधान करने का अवसर देना शामिल है।

एफएक्यू के जरिए करदाताओं को सूचित किया जाता है कि इस स्कीम के तहत एक बार राशि को अंतिम रूप दिए जाने के बाद वह अंतिम होगा और मामले को बंद कर दिया जाएगा। साथ ही किसी अन्य कार्यवाही पर भी रोक लगा दी जाएगी।

--आईएएनएस

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