मंदी का असर : ऑटो क्षेत्र के श्रमिकों को सरकार से हस्तक्षेप की आस

नई दिल्ली/मुंबई, 13 अगस्त (आईएएनएस)। मांग में कमी से नौकरी जाने की आशंका से घबराए वाहन सेक्टर के कर्मचारियों ने सरकार से राहत उपायों के माध्यम से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।

कर्मचारियों का कहना है कि नई नौकरियों में कमी फिलहाल विनिर्माताओं की तरफ हो रही है। लेकिन बाजार की ऐसी ही स्थिति जारी रहती है तो ओईएम की तरफ भी मंदी आ जाएगी।

वर्तमान में उपभोक्ताओं द्वारा उपभोग में कमी का सबसे ज्यादा असर वाहन उद्योग पर पड़ रहा है। इसके अलावा जीएसटी दरें, खेती संकट, स्थिर मजदूरी दर और तरलता का संकट भी अन्य कारक हैं, जिनका असर वाहन क्षेत्र पर पड़ रहा है।

इसके अलावा डीलरशिप के स्तर पर इंवेट्री जमा होना और बिना बिके बीएस-4 वाहनों का भारी स्टॉक जमा होना भी इस क्षेत्र के लिए बड़ी समस्या है।

वाहन उद्योग में मांग में कमी के कारण उत्पादन स्तर में गिरावट आई है, जिस कारण नौकरियां जा रही हैं।

मारुति सुजुकी, हीरो मोटोकॉर्प और होंडा मोटरसाइकिल स्कूटर इंडिया जैसे वाहन दिग्गज की मौजूदगी वाले ऑटो क्लस्टर गुरुग्राम-मानेसर के उद्योगों के एक अंदरूनी जानकार का कहना है कि उद्योग से जुड़े 50,000 से 1,00,000 अस्थायी कर्मचारियों को अवैतनिक छुट्टी पर भेज दिया गया है, जो समूचे वैल्यू चेन से जुड़े थे।

हालांकि कितनी नौकरियां गई हैं, इसका कोई प्रामाणिक आंकड़ा फिलहाल उपलब्ध नहीं है, लेकिन ज्यादातर नौकरियों में कटौती ऑटो पार्ट्स आपूर्तिकर्ताओं की तरफ की गई है।

मारुति उद्योग कामगार यूनियन के महासचिव कुलदीप जांघू ने गुरुग्राम में आईएएनएस को बताया, यह उद्योग जिंदा रहने के लिए संघर्ष कर रहा है। इसे कम जीएसटी दरों और बढ़िया सड़कों के नेटवर्क जैसे राहत उपायों की ऑक्सीजन की जरूरत है।

उन्होंने कहा, वाहन उद्योग पूरी तरह से निजी क्षेत्र द्वारा चलाया जा रहा है और ये कंपनियां अपने वर्तमान कर्मचारियों को वेतन देने की हालत में नहीं है, क्योंकि मांग घटने से उत्पादन गिर गई है।

--आईएएनएस

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