मप्र में लोकतंत्र सेनानियों का स्वाधीनता दिवस पर नहीं होगा सम्मान

भोपाल, 14 अगस्त (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में लगभग एक दशक बाद ऐसा अवसर होगा, जब आपातकाल के दौरान राजनीतिक बंदी के तौर पर जेल में वक्त गुजार चुके मीसाबंदियों को स्वाधीनता दिवस पर सम्मानित नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार के फैसले से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मीसाबंदियों ने नाराजगी जताई है।

ज्ञात हो कि जून 1975 से 1977 तक देश में आपातकाल था। उस दौरान तत्कालीन सरकार ने तमाम राजनीतिक विरोधियों को जेलों में बंद कर दिया था। मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की सरकार ने वर्ष 2008 से इन राजनीतिक बंदियों को मीसाबंदी लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिया और उसके बाद उन्हें गणतंत्र दिवस और स्वाधीनता दिवस पर सम्मानित करने का सिलसिला शुरू किया। डेढ़ दशक तक राज्य में भाजपा की सरकार रही, तब इन बंदियों को लोकतंत्र सेनानी के तौर पर विशेष मौकों पर सम्मानित किया गया। वर्तमान में कांग्रेस की सरकार ने भाजपा शासनकाल में की गई व्यवस्था को ही बंद कर दिया है।

मुख्यमंत्री कमलनाथ का कहना है, राज्य सरकार स्वाधीनता दिवस पर स्वतंत्रता सेनानियों के अलावा शहादत देने वालों के परिजनों को सम्मानित करेगी। जहां तक मीसाबंदियों की बात है तो वह मामला अलग है।

राज्य सरकार के फैसले पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिह ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे लोकतंत्र सेनानियों के अपमान से जोड़ा है। वही लोकतंत्र सेनानी संघ के पदाधिकारी तपन भौमिक ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है।

मीसाबंदियों के लिए भाजपा शासनकाल में गणतंत्र दिवस और स्वाधीनता दिवस पर मीसाबंदियों को जिला प्रशासन की ओर से विशेष आमंत्रण पत्र भेजे जाते थे। उन्हें विधिवत सरकारी वाहन भेज कर गणतंत्र दिवस समारोह स्थल तक आमंत्रित किया जाता था। इतना ही नहीं राज्य में मीसाबंदियों के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की तरह पेंशन की भी व्यवस्था की गई थी, अभी ये सब अधर में है।

--आईएएनएस

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