दुर्घटना के 51 साल बाद आईएएफ विमान के हिस्से बरामद

पश्चिमी कमान ने एएन-12 बीएल-534 विमान में सवार लापता 90 से अधिक सैनिकों के पार्थिव शरीर को बरामद करने के लिए 26 जुलाई को एक अभियान शुरू किया था। यह विमान सात फरवरी, 1968 को कुल्लू जिले में रोहतांग दर्रे के ऊपर लापता हो गया था।

पश्चिमी कमान ने एक बयान में कहा कि 5,240 मीटर की ऊंचाई पर ढाका ग्लेशियर में 13 दिनों की गहन खोजबीन के बाद टीम ने विमान के हिस्से बरामद किए। इसमें विमान के एयरो इंजन, फ्यूजलेज, इलेक्ट्रिक सर्किट, प्रोपेलर, फ्यूल टैंक यूनिट, एयर ब्रैक एसेंबली और कॉकपिट का एक दरवाजा शामिल हैं।

यात्रियों के निजी सामान भी बरामद हुए हैं।

सेना ने कहा कि जिस स्थान पर विमान के हिस्से बरामद हुए हैं, उसके सहित तलाशी वाले पूरे इलाके की भविष्य के संदर्भ के लिए मैपिंग की गई है।

इस खोजी अभियान में भारतीय वायुसेना का एक दल छह अगस्त को शामिल हुआ था, ताकि अभियान को गति दी जा सके।

विमान जब चंडीगढ़ वायुसेना अड्डे के लिए लौट रहा था, तभी रोहतांग दर्रे के ऊपर लापता हो गया था।

उसके बाद से ही यह अफवाह थी कि विमान शायद भटक कर दुश्मन के इलाके में चला गया और उसे वहां जबरन उतार लिया गया और सभी यात्रियों को युद्धबंदी के रूप में कैद कर दिया गया होगा।

लेकिन लापता विमान का रहस्य अंतत: सुलझ गया, जब 2003 में एक खोजी अभियान के दौरान ढाका ग्लेशियर के पास विमान का मलबा पाया गया और लापता विमान पर सवार एक सैनिक का पहचान-पत्र पाया गया।

इस बरामदगी ने लापता यात्रियों के परिजनों को आशा की एक नई किरण दी कि उनके शव बरामद कर लिए जाएंगे, ताकि उनके अंतिम संस्कार किए जा सकें।

उसके बाद से लापता सैनिकों के शव बरामद करने के लिए कई अभियान चलाए गए, लेकिन अभी तक मात्र पांच शव ही बरामद हो पाए हैं।

--आईएएनएस

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