संचार सेवा पर प्रतिबंध से कश्मीर के लोग नाराज

श्रीनगर, 21 अगस्त (आईएएनएस)। इमरान अहमद के लिए अपने परिवार से मिलना एक भावुक पल था। 32 वर्षीय इमरान मुंबई में कश्मीरी हस्तशिल्प का सामान बेचते हैं। वह सोमवार को हावल स्थित अपने घर लौटे।

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने वाला अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दिए जाने और संचार सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए जाने से वह एक पखवाड़े से कश्मीर में अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पाए थे।

अहमद अपने बूढ़े माता-पिता को देखकर रोने लगे। वह अपने दो-तीन साल के भतीजों के साथ लिपट गए।

अगले सप्ताह अहमद की शादी होने जा रही है, लेकिन संचार सेवाओं पर प्रतिबंध के कारण उनकी शादी की तैयारी मुश्किल हो गई है।

हालांकि मौजूदा हालात में कश्मीर में अधिकांश शादियां रद्द हो गई हैं, लेकिन अहमद ऐसा नहीं करना चाहते थे। उन्होंने अपनी शादी के समारोह को छोटा रखने की योजना बनाई।

उन्होंने कहा, संचार सेवा के बिना जीवन मुश्किल हो गया है। ऐसे हालात में कोई समारोह की बात भला कैसे सोच सकता है? समारोह बहुत साधारण रहेगा।

अहमद के पड़ोसी भी नाराज हैं। गुलाम मोहिउद्दीन ने खेद जताते हुए कहा, कश्मीर में ऐसा कभी नहीं हुआ था। हम पिंजड़े में बंद हैं।

अन्य लोगों ने कहा कि सख्ती के आदेश से गुस्सा बढ़ रहा है। मोहम्मद हफीज ने कहा, कश्मीर में निराशा बढ़ रही है और लोगों के उकसावे का यह बड़ा कारण है।

सरकारी प्रवक्ता रोहित कंसल ने कहा, सरकार ने संचार सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया है और सभी लैंड लाइन सेवाओं को बहाल करने का वादा किया है। प्रदेश में 96,000 लैंडलाइन में से 73,000 लैंड लाइन काम करने लगी हैं।

श्रीनगर के बटमालू इलाके स्थित फिरदौसाबाद के निवासी अब्दुल मजीद जैसे कुछ लोगों की शिकायत है कि जो लैंडलाइनें कुछ ही दिन पहले चालू हुई थीं वे फिर बंद हो चुकी हैं।

उन्होंने कहा, यह मजाक है। हमारे इलाके में जो लैंडलाइनें बहाल हुई थीं वह कुछ घंटे तक चालू रहीं फिर बंद हो गईं। रेडियो का बंद होना असहसनीय हो गया है।

कंसल ने कहा, हमें शिकायतें मिली हैं कि कुछ लैंडलाइनें काम नहीं कर रही हैं। हमने यह मसला बीएसएनएल के पास उठाया है। उनकी क्षमता को लेकर कुछ परेशानी है लेकिन वे इस दिशा में काम कर रहे हैं। वादों के अनुसार, लैंडलाइनें बहाल हो जाएंगी।

--आईएएनएस

Related News

Leave a Comment