उत्तराखण्ड में बारिश से मानसरोवर यात्रा रुकी

देहरादून, 21 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तराखण्ड में हुई बारिश से टनकपुर-चंपावत मार्ग पर सूखीढांग के पास 10 मीटर रोड बह गई है, जिस कारण रास्ता बंद हो गया है। इस कारण कई यात्रियों ने कैलाश मानसरोवर यात्रा बीच में ही छोड़ दी है।

उच्च हिमालयी क्षेत्र के रास्तों की खराब हालत को देखते हुए छह यात्रियों ने यात्रा बीच में ही छोड़ दी है। 56 सदस्यीय इस दल के अब तक आठ लोग यात्रा छोड़ चुके हैं।

कैलाश यात्रा के पैदल मार्ग छंकन, लामारी और मालपा में रास्ते खराब होने और पहाड़ियों से भूस्खलन होने के चलते यात्रियों को वापस धारचूला लौटा दिया गया था। यात्रियों को पर्यटक आवास गृह में ही रोका गया।

कुमांयू मण्डल विकास के जनरल मैनेजर अशोक जोशी ने आईएएनएस को बताया, भारी बारिश के कारण मानसरोवर जाने वाले यात्रियों को रोकना पड़ा है। क्योंकि शंकम और लमारी के बीच पड़ने वाले नाले में बना लकड़ी का पुल भूस्खलन की वजह से टूट गया है। जिससे पैदल चलना मुश्किल है। इस कारण कुछ यात्रियों को रोका गया है। शेष लोगों की छुट्टिया खत्म हो रही हैं। इस कारण वे वापस जा रहे हैं। हालांकि रोड मरम्मत का कार्य तेजी से जारी है। जल्द ही यात्रा एक-दो दिन में शुरू हो जाएगी।

अपनी पत्नी के साथ मानसरोवर यात्रा कर रहे नैनीताल के रोहित गर्ग ने बताया कि तेज बारिश के कारण चार जगह भूस्खलन हुआ है। इस कारण हम लोगों को सुरक्षित स्थान पर रोका गया है। कल सुबह मौसम ठीक रहा तो यात्रा पुन: शुरू हो जाएगी।

मुंबई निवासी राजेश मनानी ने बताया, हम लोग तेजी से अपनी यात्रा करते हुए आगे बढ़ रहे थे, लेकिन अचानक भूस्खलन और ऊपर से पहाड़ों के खिसकने के कारण यात्रा रोकनी पड़ी। हमारे दल के 13 लोग हम लोगों से आगे झांकन तक पहुंच गए थे। लेकिन बाद में वहां भी मौसम खराब होने कारण एनडीआरएफ उन्हें वापस लाई है। लगभग 13 से 14 यात्रियों ने यहीं से अपनी यात्रा रद्द कर दी और वे घर चले गए। उन्हें अपने व्यक्तिगत कार्य थे।

उत्तराखण्ड में आपदा से अब तक 59 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 55 घायल और 12 लापता हैं। वहीं आपदा से उत्तरकाशी जिले की तहसील मोरी के कोटीगाड़ क्षेत्र का करीब 70 वर्ग किमी क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आपदा से उत्तरकाशी जिले के साथ ही पूरे प्रदेश में हुए नुकसान का ब्योरा रखा। उन्होंने बताया कि राज्य में आपदा से 62 बड़े व 263 छोटे पशुओं की हानि हुई है। इसके अतिरिक्त 134 आवासीय भवन आंशिक व 115 पूरी तरह नष्ट हुए हैं। उत्तरकाशी जिले की मोरी तहसील में आपदा से 17 भवन पूर्ण क्षतिग्रस्त, 115 आंशिक क्षतिग्रस्त, दो मोटरपुल, दो पैदल पुल, 14 किमी विद्युत लाइन, 12 किमी 11 केवी लाइन, आठ ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं।

उन्होंने आपदा प्रभावित आराकोट, त्यूणी व मोरी से सेब की फसल को गांवों से सड़क तक लाने और फसल को नुकसान से बचाने की हिदायत दी। जिन गांवों में संचार व्यवस्था नहीं है, वहां सैटेलाइट फोन की व्यवस्था की जाएगी।

मुख्यमंत्री रावत ने कहा है कि आराकोट क्षेत्र में आई आपदा में बेघर हुए लोगों के लिए फिलहाल अस्थाई घर बनाए जाएंगे। क्षेत्र में मलबे में दबे लोगों को निकालने का काम और घायलों का उपचार प्राथमिकता से किया जा रहा है। आपदा में मारे गए लोगों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।

--आईएएनएस

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