झारखंड के खेतों की मिट्टी की सेहत जांचेंगी डॉक्टर दीदियां

रांची, 22 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की महिलाएं अब मिट्टी की डॉक्टर बनेंगी। वे अब गांव-गांव जाकर खेतों की मिट्टी की सेहत की जांच करेंगी और किसानों को मिट्टी में मौजूद बीमारी के बारे में बताएंगी। सरकार का मानना है कि मिट्टी की बीमारियों की सही जानकाारी मिल जाए और उसके उपयोग का पता चल जाए तो उत्पादकता जरूर बढ़ेगी।

कृषि व पशुपालन विभाग की सचिव पूजा सिंघल ने गुरुवार को बताया कि डॉक्टर दीदियों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में 3000 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। गांव के स्तर पर मिट्टी की जांच होगी। सभी पंचायतों में यह व्यवस्था लागू करने की योजना है।

उन्होंने बतााया, मिट्टी की जांच के लिए हर पंचायत स्तर पर दो महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें मिट्टी की डॉक्टर दीदी बनाया जाएगा। मिट्टी जांच के लिए पंचायत स्तर पर 3164 प्रयोगशालाओं की स्थापना हो चुकी है, 1203 प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा रही है।

रांची में बुधवार को आयोजित मिट्टी के डॉक्टर सम्मान और मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण समारोह में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 16 मिट्टी के महिला डॉक्टरों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में मिट्टी की डॉक्टर दीदियों के बीच मिट्टी जांच किट का वितरण किया गया। इस उपकरण से वैज्ञानिक तरीके से खेत की बीमारियों का पता लगाया जा सकेगा और मिट्टी को स्वस्थ बनाया जाएगा।

मिट्टी की डॉक्टर दीदी सुमन ने आईएएनएस को बताया कि मिट्टी की जांच करने के बाद किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड दिया जाता है।

उन्होंने कहा, खेत की मिट्टी जांच कर किसानों को उनके खेत में किन-किन पोषक तत्वों की कमी की जानकारी दी जाती है। इससे किसान जरूरी पोषक तत्वों को खेत में डालकर मिट्टी को ठीक कर अच्छा उत्पादन ले सकेंगे।

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी ट्वीट किया, आज से पूरी दुनिया आपको मिट्टी के डॉक्टर के तौर पर जानेगी। आप किसानों के खेत की मिट्टी की जांच करेंगी और उन्हें फसल लगाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि झारखंड में 8734 मिट्टी की डॉक्टर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि यदि एक दीदी एक दिन में स्वयं तीन खेत की जांच करती है तो महीने में उनकी आमदनी 14 हजार रुपये होगी।

कृषि विभाग की सचिव ने बताया, मृदा स्वास्थ योजना किसानों के लिए बहुत ही फायदेमंद योजना है। राज्य में बहुत से ऐसे किसान हैं, जो यह नहीं जानते कि अधिकतम उपज प्राप्त करने के लिए फसलों का पोषण किस प्रकार किया जाना चाहिए। वे अपने अनुभव से फसल उत्पादन को बढ़ाने का प्रयास करते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि मिट्टी के हालातों को कैसे सुधारा जा सकता है। इसका निदान मृदा स्वास्थ्य कार्ड ही है।

वे कहती हैं कि इस पहल से न केवल राज्य की महिलाएं स्वावलंबी बनेंगी, बल्कि उनका कृषि के प्रति दिलचस्पी भी बढ़ेगी। इसके अलावा किसानों के खेतों की मिट्टी की भी जांच हो सकेगी।

--आईएएनएस



Source : ians

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