केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 70000 करोड़ रुपये डालेगी

वर्तमान में देश की अर्थव्यवस्था की हालत खस्ताहाल है, जिसके कारणों में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) की उच्च दरें, किसानों की बदहाली (खेती से कमाई घटने), मजदूरी की दर (बढ़ने की बजाए) स्थिर रहने, और बाजार में तरलता (नकदी) की कमी प्रमुख हैं।

इसके अलावा, एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां) को तरलता का संकट होने के कारण वाहन क्षेत्र समेत अन्य पूंजीगत वस्तुओं की खरीद प्रभावित हो रही है और ये क्षेत्र संकट में हैं।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकारी बैंकों में 70,000 करोड़ रुपये की पूंजी तुरंत डाली जा रही है, ताकि वे अतिरिक्त कर्ज मुहैया करा सकें। इस कदम से सरकारी बैंक पांच लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त कर्ज मुहैया करा पाएंगे।

उन्होंने आगे घोषणा की कि सरकारी बैंकों ने रेपो रेट से जुड़े कर्ज उत्पाद पेश करने का फैसला किया है।

सरकारी बैंकों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि कर्ज की रकम वापस लौटाने के 15 दिनों के अंदर ग्राहकों को कर्ज के दस्तावेज वापस लौटाने होंगे।

--आईएएनएस

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