सुप्रीम कोर्ट ने आरटीआई पोर्टल मामले में केंद्र व राज्यों को भेजा नोटिस

नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और राज्य सरकारों को सूचना का अधिकार (आरटीआई) पोर्टल स्थापित करने की मांग करने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में कहा गया है कि लोगों को किसी भी विभाग से जानकारी के लिए ऑनलाइन आवेदन करने में सक्षम बनाने के लिए इस पोर्टल की जरूरत है।

न्यायमूर्ति एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील जोस अब्राहम के माध्यम से एनजीओ प्रवासी कानूनी सेल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किया।

यह एनजीओ विदेश में बसे भारतीयों (एनआरआई) सहित प्रवासी लोगों को कानूनी मोर्चे पर सशक्त बनाने के लिए काम करता है। एनजीओ ने सभी राज्य सरकारों से इलेक्ट्रॉनिक मोड के माध्यम से जानकारी प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल सुविधा प्रदान करने संबंधी निर्देश जारी करने की मांग की है।

आरटीआई अधिनियम को एक प्रभावी शक्ति बताते हुए अधिवक्ता अब्राहम ने कहा कि नागरिकों के अनुरोध पर सरकारी जानकारी के लिए समय पर मिली प्रतिक्रिया इस कानून के सही उद्देश्य को पूरा करेगी। उन्होंने इसके लिए प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाए जाने पर जोर दिया।

याचिका में कहा गया, धारा 7 (1) आरटीआई अधिनियम के सबसे प्रभावी प्रावधानों में से एक है। इसमें कहा गया है कि किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता के लिए मांगी गई सूचना अनुरोध प्राप्त होने के 48 घंटों के अंदर प्रदान की जाएगी। मौजूदा प्रणाली के तहत यह प्रभावी नहीं है, जिससे नागरिकों का जीवन और स्वतंत्रता गंभीर रूप से प्रभावित होती है।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार ने मंत्रालयों या विभागों से आरटीआई अधिनियम के तहत जानकारी प्राप्त करने के लिए एनआरआई सहित किसी भी भारतीय नागरिक के लिए एक ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल की स्थापना की है।

आवेदक शुल्क का भुगतान ऑनलाइन अदा कर आरटीआई आवेदन जमा कराया जा सकता है।

केंद्र सरकार ने दिसंबर 2013 में राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने राज्यों में ऑनलाइन आरटीआई लागू करने की संभावनाओं का पता लगाएं।

केंद्र ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) से कहा कि वह राज्य सरकारों को सॉफ्टवेयर और स्रोत कोड जैसी तकनीकी सहायता प्रदान करे।

याचिकाकर्ता ने कहा कि केवल महाराष्ट्र और दिल्ली ने ऑनलाइन पोर्टल स्थापित किए हैं।

वकील ने कहा कि फिलहाल सूचना मांगने वाले व्यक्ति को एक फिजिकल आवेदन करना होता है।

साथ ही आवेदक को डाकघर जाकर आवेदन के लिए शुल्क का भुगतान कर एक पोस्टल ऑर्डर प्राप्त करना होता है। फिर आवेदन को संबंधित विभाग को भेज दिया जाता है।

याचिकाकर्ता ने कहा, एनआरआई के लिए वर्तमान में राज्य सरकारों के किसी भी विभाग से जानकारी प्राप्त करना मुश्किल है, क्योंकि उन्हें एक पारंपरिक आवेदन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

--आईएएनएस

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