चिदंबरम के खिलाफ ईडी का अगला मामला एयर इंडिया सौदा

नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया मामले में इस समय सीबीआई की हिरासत में हैं। लेकिन उनकी परेशानी यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय उनके खिलाफ 70,000 करोड़ रुपये के एयर इंडिया सौदा मामले में एक मामला दर्ज करने की कोशिश में जुटा हुआ है। यह जानकारी सूत्रों ने सोमवार को दी।

एयर इंडिया सौदा कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन संप्रग सरकार के दौरान 2007 में एयर इंडिया के लिए 111 विमान -एयरबस से 43 विमान और बोइंग से 68 विमान- खरीदने से जुड़ा है।

सूत्रों ने कहा कि ईडी इस सौदे के संबंध में चिदंबरम से पूछताछ करना चाहता है, क्योंकि मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह का वही नेतृत्व कर रहे थे, जिसने विमान खरीदी को मंजूरी दी थी। कथित तौर पर चिदंबरम ने एयरबस और बोइंग से, शुरुआती जरूरत से अधिक विमान खरीदने को मंजूरी दी थी।

सूत्र के अनुसार, ईडी सौदा प्रक्रिया के दौरान चिदंबरम से जुड़ीं शेल कंपनियों तक पहुंचने वाले धन के रास्ते के बारे में अतिरिक्त सबूत जुटाने की प्रक्रिया में है।

ईडी ने एयर इंडिया मामले में पहले चिदंबरम को पूछताछ के लिए सम्मन किया था, लेकिन चूंकि वह आईएनएक्स मीडिया मामले में 21 अगस्त की रात गिरफ्तारी के बाद से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की हिरासत में हैं, लिहाजा एजेंसी उनसे पूछताछ नहीं कर सकी।

ईडी को आईएनएक्स मीडिया मामले की जांच के दौरान चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति के स्वामित्व वाली 17 शेल कंपनियों और विदेशों में 10 संपत्तियों के बारे में पता चला है। एजेंसी यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही कि एयर इंडिया सौदे से हासिल पैसा इन कंपनियों तक किस रास्ते से पहुंचा।

सूत्र ने कहा कि कई ऐसे लोग एजेंसी के रडार पर हैं, जिन्होंने इन शेल कंपनियों के बेनामी निदेशक के रूप में काम किया। सूत्र ने संकेत दिया कि चिदंबरम और उनके बेटे ने धन के रास्ते को पकड़ पाना अधिक जटिल बनाने के लिए शेल कंपनियों के शेयर होल्डिंग के पैटर्न बदल दिए थे।

सूत्र ने कहा, ये शेल कंपनियां चिदंबरम की तरफ से निगमीकृत कराई गई थीं। ईडी की जांच से पता चला है कि शेल कंपनियों से जुड़े लोगों ने किस तरह चिदंबरम की पोती के पक्ष में एक वसीयतनामा किया है।

इन शेल कंपनियों का इस्तेमाल चिदंबरम के वित्तमंत्री रहते उनके बेटे की कथित सांठगांठ से विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की अवैध मंजूरी के लिए रिश्वत राशि प्राप्त करने के लिए किया जाता था। ईडी की जांच में कथित तौर पर पता चला है कि शेल कंपनियों के जरिए प्राप्त होने वाली रिश्वत का इस्तेमाल चिदंबरम और उनके बेटे अपने निजी खर्च के लिए करते थे।

सूत्र ने कहा कि एजेंसी को सबूत मिला है कि कार्ति से जुड़ी एक शेल कंपनी को ब्रिटिश वर्जिन आईसलैंड स्थित एक कंपनी से भारी मात्रा में भुगतान प्राप्त हुआ था, जिसका जिक्र पनामा पेपर्स लीक्स में भी था।

ईडी इस मामले में इसके पहले पूर्व विमानन मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल से पूछताछ कर चुकी है। सूत्र ने कहा कि पटेल ने पूछताछ के दौरान कहा था कि सभी निर्णय सामूहिक रूप से लिए गए थे। मनमोहन सिंह की सरकार ने दिसंबर 2005 में एयर इंडिया के लिए बोइंग से 68 विमानों के सौदे को मंजूरी दी थी। एक साल बाद इंडियन एयलाइंस ने एयरबस एसई से 43 विमान खरीदने का सौदा किया था।

दोनों सरकारी विमानन कंपनियों का 2007 में विलय हो गया और एक कंपनी एयर इंडिया रह गई। सीबीआई इसकी भी जांच कर रही है।

मई 2017 में सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद सीबीआई ने कथित अनियमितता में तीन मामले और एक प्राथमिक जांच दर्ज किए। सीबीआई बगैर किसी उचित प्रक्रिया के विमान को ठेके पर देने की जांच कर रही है साथ ही इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं लाभकारी मार्गो को निजी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विमानन कंपनियों को तो नहीं दे दिए गए, जिसके कारण एयर इंडिया को भारी नुकसान हुआ।

कॉरपोरेट लॉबिस्ट दीपक तलवार इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। उनपर आरोप है कि उन्होंने प्रफुल्ल पटेल के साथ अपनी निकटता का इस्तेमाल करते हुए तीन अंतर्राष्ट्रीय विमानन कंपनियों के लिए लाभकारी एयर ट्रैफिक राइट्स हासिल किए थे। एजेंसी ने मामले में एक आरोप-पत्र दाखिल किए हैं।

ईडी चिदंबरम की उन शेल कंपनियों के विवरण की भी जांच कर रही है, जिनके संबंध में सीबीआई ने शुक्रवार को पांच देशों -ब्रिटेन, स्विटजरलैंड, बरमुडा, मॉरीशस और सिंगापुर- को पत्र लिखे हैं और इन कंपनियों के बारे में तथा बैंक खातों के बारे में विवरण मांगे हैं।

--आईएएनएस



Source : ians

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