देश की पहली महिला डीजीपी कंचन चौधरी का निधन

भट्टाचार्य को मुंबई में भर्ती हुए पांच महीने से अधिक हो गए थे।

आम आदमी पार्टी (आप) की पूर्व सदस्य अपने पीछे पति और दो बेटियों को छोड़कर चली गईं। वह किरण बेदी के बाद देश की दूसरी महिला भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) ऑफिसर थीं। भट्टाचार्य 1973 बैच की अधिकारी थीं। उन्होंने 2004 में उत्तराखंड की डीजीपी बनकर इतिहास रच दिया। वह इस पद को हासिल करने वाली भारत की पहली महिला पुलिस अधिकारी बनीं।

मूल रूप से अमृतसर निवासी कंचन शुरू से ही पुलिस अधिकारी बनना चाहती थीं। उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने दलितों का समर्थन करने के साथ ही महिलाओं के खिलाफ पूर्वाग्रह का मुकाबला किया। उन्होंने यातायात की व्यवस्था करने वाली महिला होमगाडरें की नीति लागू की।

अक्टूबर 2007 में अपनी सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। वह आप की उम्मीदवार के तौर पर 2014 के लोकसभा चुनाव में हरिद्वार से हार गई।

कंचन के पुलिसकर्मी बनने के संघर्षो को दर्शाने वाला एक टेलिविजन धारावाहिक उड़ान भी आता था। इसमें कंचन की भूमिका उनकी बहन कविता चौधरी ने निभाई थी। इस धारावाहिक में कंचन भी अतिथि भूमिका में नजर आई थीं।

उत्तराखंड पुलिस ने मंगलवार को कंचन चौधरी के निधन पर शोक व्यक्त किया और डीजीपी के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उनके महान योगदान को भी याद किया।

आईपीएस एसोसिएशन (आईपीएसए) ने उनके निधन पर एक बयान में कहा, हमारी एक आइकन। पहली महिला आईपीएस और भारत की दूसरी महिला डीजीपी अधिकारी। एक अधिकारी जो दिमाग और दिल से शानदार थीं। उनका एक शानदार करियर था, जो कई पुरस्कारों से सुशोभित था।

आप प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी एक शोकसभा में कहा, देश की पहली महिला पुलिस महानिदेशक कंचन चौधरी भट्टाचार्य के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। वह अपनी सेवानिवृत्ति के बाद सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहीं और आखिरी समय तक देश की सेवा करना चाहती थीं। उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

अपने 33 साल के लंबे पुलिस करियर के दौरान उन्हें 1997 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। भट्टाचार्य ने 2004 में मैक्सिको में एक इंटरपोल की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया था।

--आईएएनएस

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