चिदंबरम के वकीलों ने पीएमएलए कानून लागू करने के औचित्य पर बहस की

नई दिल्ली, 27 अगस्त (आईएएनएस)। आईएनएक्स मीडिया मामले में अग्रिम जमानत के लिए पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम की याचिका पर इस सप्ताह दूसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान उनके वकीलों ने पीएमएलए कानून को पूर्व प्रभाव से लागू करने के खिलाफ बहस पेश की।

चिदंबरम की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि यह कथित आरोप 2007 का है, लेकिन पीएमएलए के प्रावधान 2009 में लागू हुए। इसके बावजूद ईडी ने चिदंबरम के खिलाफ इन प्रावधानों को लागू किया है।

सिंघवी ने दलील की कि चिदंबरम के खिलाफ कानून के मुख्य प्रावधान 2009 में पीएमएलए के तहत अनुसूचित थे। जबकि इससे एक साल पहले ही 2007-08 में कथित एफआईपीबी की मंजूरी दी गई थी।

सिंघवी ने अदालत को बताया कि चिदंबरम पर जिन धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, वे तब मौजूद नहीं हुए थे, जब कथित लेन-देन हुआ था।

सिंघवी ने अदालत से कहा कि आप एक व्यक्ति को साजिशकर्ता के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि यह कानून उस समय मौजूद नहीं था, जिस समय आरोप लगाया गया था।

जांच एजेंसियों द्वारा अपनाई गई पूछताछ के तरीके पर दलील देते हुए सिंघवी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे चिदंबरम से स्वीकारोक्ति का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि जांच एजेंसियां एक गलत तस्वीर पेश कर रही हैं कि चिदंबरम अपनी बात पर अस्पष्ट थे।

इस बीच चिदंबरम के एक अन्य वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सीबीआई की हिरासत में चिदंबरम से हो रही पूछताछ की ट्रांस्क्रिप्ट प्रस्तुत करने के लिए एक आवेदन दायर किया।

सिब्बल ने शीर्ष अदालत से कहा कि वह अदालत में सीलबंद लिफाफे में रिकॉर्ड जमा करने के ईडी के अनुरोध का विरोध करते हैं।

सिब्बल ने अदालत को बताया कि ईडी छिपा कर दस्तावेज पेश कर गिरफ्तारी और पूछताछ की मांग नहीं कर सकती है। क्योंकि हिरासत के मामलों में भी यह संभव नहीं है।

--आईएएनएस

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