उप्र में तबादलों, ठेका पट्टी की होगी खुफिया निगरानी

लखनऊ, 28 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में होने वाले तबादलों और ठेका पट्टी की विशेष निगरानी करने की तैयारी में है। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मंत्रियों से संबंधित विभागों के कामकाज की निगरानी शुरू हो गई है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, योगी मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही मंत्रियों के विभागों और उनके निजी सचिव के साथ ही जनसंपर्क अधिकारियों के कामकाज पर भी पैनी निगाह रखी जा रही है। संगठन और सरकार के महत्वपूर्ण लोगों के साथ ही खुफिया एजेंसी भी नजर रखे हुए है।

मुख्यमंत्री जनप्रतिनिधियों के अलावा दूसरे माध्यम से भी अपने मंत्रियों के कामकाज की जानकारी लेंगे। मंत्रियों को आगाह किया गया है कि वे कोई ऐसा कार्य न करें, जिससे सरकार और संगठन की किरकिरी हो और विपक्ष को बैठे-बिठाए कोई मुद्दा मिल जाए। अब योगी का पूरा जोर पारदर्शिता और ईमानदारी पर है।

तबादलों में धांधली के चलते कई मंत्रियों की किरकिरी हो चुकी है। कुछ की छुट्टी भी इसीलिए हुई। मुख्यमंत्री ने शिकायत मिलने पर इन तबादलों को निरस्त जरूर किया, लेकिन अब उनकी कोशिश है कि किसी विभाग में यह फिर न दोहराया जाए। उनका लक्ष्य है कि पारदर्शी तरीके से कार्य हो, जिससे किसी को उंगली उठाने का मौका न मिले। शपथ ग्रहण के बाद मंत्रियों को संबोधित करते हुए योगी ने यह अपेक्षा की थी कि अपने निजी स्टाफ और रिश्तेदारों को लेकर सावधान रहें।

एक अधिकारी ने बताया कि अब से होने वाले सभी तबादले और टेंडर प्रणाली पर मुख्यमंत्री की पैनी निगाह रहेगी। कुछ धांधली की बातों ने सरकार की छवि को खराब किया है। इसी कारण विभागों की देखरेख के लिए कुछ गुप्त लोगों को लगाया गया है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. चंद्रमोहन ने कहा, योगी सरकार 100 फीसदी ईमानदारी के साथ आगे बढ़ रही है। सरकार की नीति है कि जीरो टॉलरेंस पर काम किया जाए। विभागों में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार मुख्यमंत्री को बर्दाश्त नहीं है। इसके लिए सख्त कदम उठाए जाते रहे हैं और आगे भी उठाए जाएंगे।

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार से पहले पांच मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इनमें परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल, धर्मपाल सिंह, अर्चना पांडेय और अनुपमा जायसवाल शामिल हैं। अपने इस्तीफे में राजेश अग्रवाल ने उम्र ज्यादा होने के कारण मंत्री पद छोड़ने की बात कही है। स्वतंत्र देव को प्रदेश अध्यक्ष बनने के कारण इस्तीफा देना पड़ा। मगर अन्य मंत्रियों से विभागों में गड़बिड़यां उजागर होने के बाद इस्तीफा लिए जाने की बात कही जा रही है।

--आईएएनएस

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