कश्मीर पर शाह फैसल और नेकां का परस्पर विरोधी रुख

फैसल और उनके सहयोगी कश्मीर पर परस्पर विरोधी रुख अपनाए हुए हैं।

फैसल ने ट्वीट किया था कि ईद का त्योहार नहीं मनाया जाएगा क्योंकि दुनिया भर के कश्मीरी अपनी जमीन पर अवैध कब्जे का शोक मना रहे हैं।

उन्होंने कहा, जब तक 1947 के बाद से चोरी की गई और छीन ली गई सभी चीजें वापस नहीं लौटा दी जाती, तब तक ईद नहीं मनाई जाएगी। तब तक कोई ईद नहीं, जब तक अपमान का बदला नहीं लिया जाता

फैसल ने इस साल जनवरी में आईएएस अधिकारी के पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में उन्होंने अपना राजनीतिक संगठन जम्मू एवं कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट लॉन्च किया।

इसी तरह कश्मीर के एक प्रमुख राजनीतिक दल नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) ने धारा-370 को निरस्त करने के खिलाफ अपना विरोध जताया, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गई याचिका में पार्टी ने एक विरोधाभासी रुख अपनाया है।

नेकां ने अपनी याचिका में कहा, भारत राज्यों का संघ है, जो एक अद्वितीय संघीय संरचना में बंधा हुआ है। यह संघीय ढांचा हमारे देश की जरूरत व इतिहास के आधार पर वर्षो से संगठित रूप से विकसित हुआ है।

दिलचस्प बात यह है कि फैसल और नेकां ने कश्मीर और भारत के बीच एक औपचारिक संघ के अस्तित्व से इनकार नहीं किया है। उन्होंने भी इसे देश का अभिन्न अंग माना है।

उनकी याचिकाओं में शीर्ष अदालत के लिए एक सामान्य प्रश्न है। केंद्र इस अनूठी संघीय स्कीम (अनुच्छेद 370) पर राष्ट्रपति शासन के कवर के तहत कैसे एकतरफा फैसला कर सकता है। उनकी याचिका में नियत प्रक्रिया के महत्वपूर्ण तत्वों और कानूनों का उल्लंघन होने की बात कही गई है।

उनकी याचिकाएं स्पष्ट रूप से समान हैं। इसमें वह दावा करते हैं कि कश्मीर पर सरकार का निर्णय संघीय ढांचे पर प्रहार करने से लेकर लोकतंत्र व कानूनों के नियमों पर किया गया एक बड़ा हमला है।

नेकां ने अपनी याचिका में कहा है कि जम्मू एवं कश्मीर विधानसभा ने राज्य के लिए एक संविधान का मसौदा तैयार किया है, विशेष रूप से यह मानते हुए कि राज्य भारतीय संघ का एक अभिन्न अंग है। इस तरह से फैसल और नेकां दोनों धारा-370 के रद्द होने पर अपने रुख का ही खंडन करते दिखते हैं।

--आईएएनएस

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