रविदास मंदिर विवाद में केंद्र करे हस्तक्षेप : पंजाब की पार्टियां

नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। तुगलकाबाद में 500 साल पुराने रविदास मंदिर का विध्वंस पंजाब में एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया है। वहां के दोआबा क्षेत्र में दबदबा रखने वाले उग्र रविदासिया समुदाय ने राज्य सरकार से इस मामले पर हस्तक्षेप करने की मांग की है।

पंजाब में देश की सबसे अधिक अनुसूचित जाति की आबादी है। समुदाय में भारी आक्रोश को लेकर केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। राज्य के कई हिस्सों में समुदाय के विरोध प्रदर्शन के कारण पंजाब के नेताओं ने इस मामले में केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की है।

समुदाय का दावा है कि दिल्ली में स्थित रविदास मंदिर का ऐतिहासिक महत्व है। समुदाय उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराना चाहता है, जहां कोर्ट के आदेशों पर मंदिर को तोड़ दिया गया था। गुरु रविदास के अनुयायी पंजाब में रविदासिया के रूप में जाने जाते हैं। राज्य में उनकी जनसंख्या 30 प्रतिशत से अधिक है।

प्रभावशाली वाल्मीकि समाज गुरु रविदास के अनुयायी हैं और दिल्ली के तुगलकाबाद में उनके मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी में सिकंदर लोधी के शासनकाल के दौरान किया गया था। गुरु रविदास ने यहां तीन दिन बिताए थे, जिससे समुदाय के लिए इस मंदिर का महत्व काफी अधिक है।

शिअद (बादल) के अलावा, मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने भी शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। पंजाब सरकार ने इस मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान करने के लिए समुदाय के नेताओं के साथ बैठकें की हैं।

पंजाब के दोआबा क्षेत्र में देश में अनुसूचित जाति की आबादी सबसे अधिक है। सतलज और ब्यास नदियों के बीच के क्षेत्र में सच खंड बल्लन सहित कई डेरे (आध्यात्मिक सामुदायिक केंद्र) हैं, जिनमें 20 लाख से अधिक अनुयायी हैं।

--आईएएनएस

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