बिहार में मुख्यमंत्री को भाजपा की सलाह पर विपक्ष ने किया सवाल

पटना, 10 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नेताओं की बयानबाजी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सलाह मिलने के बाद विपक्ष ने भी मुख्यमंत्री से सवाल किया।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता संजय पासवान द्वारा नीतीश को बिहार की राजनीति छोड़कर केंद्र की राजनीति करने की सलाह दिए जाने के अगले दिन मंगलवार को बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने पासवान के बयान के बहाने मुख्यमंत्री पर तंज कसा है। तेजस्वी ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या वे भाजपा की बातों का खंडन कर सकेंगे?

तेजस्वी ने ट्वीट कर लिखा, क्या मुख्यमंत्री भाजपाइयों की बात का खंडन करने का माद्दा रखते हैं? क्या यह सच नहीं है कि नीतीश कुमार ने मोदी के नाम पर वोट मांगकर और अपना घोषणापत्र जारी किए बिना ही भाजपा के घोषणापत्र पर 16 सांसद बना लिए? क्या यह यथार्थ नहीं है कि हरेक विधेयक पर वे भाजपा का समर्थन कर रहे हैं? फिर वो अलग कैसे?

संजय पासवान ने सोमवार को यह भी कहा था, नीतीश कुमार के काम पर पूरा भरोसा है, लेकिन बिहार में उन्हें 15 साल हो गए। इस बार उप मुख्यमंत्री को पूरा मौका मिलना चाहिए। नीतीश कुमार को सेकंड लाइन के नेताओं को मौका देना चाहिए। 15 साल का समय बहुत लंबा होता है।

भाजपा नेता के इस बयान के बाद विपक्षी राजद भी निशाना साध रहा है। राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने मंगलवार को कहा कि नीतीश कुमार को अब खुद की स्थिति का आकलन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुर्सी के लिए कुछ भी कर सकते हैं।

संजय पासवान के बयान पर मुख्यमंत्री की पार्टी जद (यू) भी भड़क उठी। पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा, हमें किसी से सर्टिफिकेट लेने की कोई जरूरत नहीं है। नीतीश कुमार के काम को सब जानते हैं। वह बिहार का एक बड़ा चेहरा हैं। उन्होंने संजय पासवान पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका मोदी मॉडल 2015 में कहां चला गया था?

बिहार में विधानसभा चुनाव अगले साल होना है, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर सत्ताधारी गठबंधन में अलग-अलग सुर उठने लगे हैं। बयानों से साफ है कि गठबंधन सहयोगी भाजपा अब अपनी पार्टी का मुख्यमंत्री चाहती है।

--आईएएनएस

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