सरदार सरोवर का पानी मप्र के 15946 परिवारों से कर रहा मनमानी

भोपाल, 15 सितंबर (आईएएनएस)। सरदार सरोवर बांध का बढ़ता जलस्तर गुजरात में भले ही खुशहाली की कहानी लिख रहा हो, मगर मध्यप्रदेश के तीन जिलों में घुसकर मनमानी कर रहा है। हजार से ज्यादा परिवारों की खुशहाली छीन रहा है। इनके घरों में पानी घुस रहा है, मगर इन्हें डूब क्षेत्र से बाहर माना जा रहा है। इन लोगों के सामने संकट यह है कि गांव में रहें तो जान जाएगी और गांव छोड़ दें तो जीवन मुश्किलों भरा होगा।

अंतर्राज्यीय परियोजना के तहत सरदार सरोवर बांध में 138़ 68 मीटर की ऊंचाई तक पानी भरा जाना है, इस समय बांध का जलभराव इसी स्तर तक पहुंचने के करीब है। बांध के बढ़ते जलस्तर से मध्यप्रदेश के तीन जिलों के 192 गांव और एक नगर (सरकारी आंकड़ों के अनुसार 178 गांव) डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। इसके अलावा कई गांव ऐसे हैं, जिन्हें सरकार डूब क्षेत्र में नहीं मान रही, फिर भी बैक वाटर इन गांवों को डुबो रहा है। इन गांवों के बाशिंदे पल-पल बढ़ते बांध के जलस्तर के बीच अपनी जिंदगी को डूबते हुए देखने को विवश हैं।

बड़वानी जिले का गांव है पीपरी। इसे डूब प्रभावित गांव की श्रेणी से बाहर किया गया है, मगर सरदार सरोवर का बैक वाटर धीरे-धीरे इस गांव में भर रहा है। लगभग 250 परिवारों वाले इस गांव में 60 मकान हैं। इनमें से 10 मकानों में पानी भरने लगा है।

पीपरी गांव के नंदू और रोहिदास बताते हैं कि उनके घरों और खेतों में पानी भर रहा है। उनके सामने समस्या यह है कि गांव में रहेंगे तो डूबकर मर जाएंगे और गांव छोड़ेंगे तो उनकी जिंदगी पहाड़ बन जाएगी। सरकार ने उन्हें डूब क्षेत्र से बाहर रखा था, जिसके चलते उनके हिस्से में किसी भी तरह की सुविधा नहीं आई।

पीपरी गांव के ही आमोद सालकराम कहते हैं कि सरदार सरोवर का बैक वाटर उनके घरों और खेतों में आने लगा है, मगर उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। उन्हें मुआवजा भी नहीं मिला और कोई उनकी मदद करेगा, इसकी आस भी नहीं है।

नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े अमूल्य निधि कहते हैं कि सरदार सरोवर का पानी इस राज्य में सिर्फ इंसानी जिंदगी ही तबाह करने पर आमादा नहीं है, बल्कि यहो तो जानवर भी मौत की नींद सोने की स्थिति में आ गए हैं। यहां संस्कृति, विरासत और धार्मिक स्थल भी जलमग्न होते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, राज्य की पूर्ववर्ती सरकार ने प्रदेशवासियों के साथ छल किया। सर्वोच्च न्यायालय में गलत आंकड़े पेश किए और प्रभावितों के हक पर डाका डाला।

सरकार बदलने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ भी क्षेत्र की समस्या को लेकर केंद्र सरकार को तीन पत्र लिखकर बांध का जलस्तर न बढ़ाए जाने का अनुरोध कर चुके हैं, मगर बात नहीं बनी। सरदार सरोवर बांध में अब तय सीमा तक पानी भरने को है।

नर्मदा बचाओ आंदोलन की अगुवा मेधा पाटकर ने दो बार सत्याग्रह किया, कमलनाथ सरकार ने उन्हें प्रभावितों के साथ न्याय किए जाने का भरोसा दिलाया। उसके बाद इंदौर में प्रभावितों और राज्य के मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल के साथ बैठक हुई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।

अमूल्य निधि के मुताबिक, पूर्ववर्ती सरकार ने डूब प्रभावित परिवारों के अलावा 15946 परिवारों को गलत आंकड़े तैयार कर डूब क्षेत्र से बाहर बता दिया था। ये परिवार सरदार सरोवर के बैक वाटर की जद में हैं। ये वे लोग हैं, जिन्हें दोनों तरफ से मार पड़ी है। एक तरफ तो उन्हें मुआवजे का हक नहीं मिला और दूसरी ओर वे डूब रहे हैं। उनकी जमापूंजी आंखों के सामने डूब रही है। वे आखिर करें क्या?

धार जिले के खेरा गांव को डूब से बाहर माना गया है, और इस गांव में 100 से ज्यादा परिवार निवासरत हैं, जिनमें से 87 परिवार डूब में आ गए हैं। उनकी खेती गेहल गांव में है, उनके खेतों में लाखों की केला की खेती है, वह भी डूब रही है। इन लोगों के सामने सवाल है कि वे करें तो क्या करें?

धार जिले का चिखल्दा गांव का बड़ा हिस्सा डूब चला है। यहां 1200 मकान हैं और आबादी लगभग साढ़े तीन हजार है। इस गांव के घरों में पानी भर गया है, लोगों की आंखों के आंसू थम नहीं रहे हैं। वे घर-खेत को अपनी आंखों के सामने डूबते देख रहे हैं, मगर उनकी व्यथा सुनने वाला कोई नहीं है।

--आईएएनएस

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