उत्तराखंड : छात्रवृत्ति घोटाले की जांच पूरी, छापामारी शुरू, कई संस्थान व बैंक फंसेंगे (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने उत्तराखंड के समाज कल्याण विभाग द्वारा छात्रवृत्ति वितरण में किए गए घोटाले की जांच पूरी कर ली है। इस सिलसिले में एसआईटी ने राज्यभर में अलग-अलग स्थानों पर कई आपराधिक मामले दर्ज किए हैं। इस घोटाले की आंच उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ इंजीनियरिंग कॉलेजों को भी छूएगी। इतना ही नहीं, निजी विश्वविद्यालय और देश के नामी-गिरामी बैंक भी इस घोटाले की चपेट में आने से नहीं बचेंगे।

इस घोटाले में राज्य के कई बड़े नामों और संस्थानों के भी फंसने की संभावना से एसआईटी फिलहाल इनकार नहीं कर रही है। एसआईटी ने मामले की जांच पूरी होते ही, घोटाले में शामिल संदिग्धों की तलाश में राज्यभर में ताबड़तोड़ छापामारी शुरू कर दी है।

एसआईटी प्रमुख और उत्तराखंड पुलिस के महानिरीक्षक संजय गुंज्याल (आधुनिक शाखा) ने इसकी पुष्टि करते हुए गुरुवार शाम आईएएनएस को टेलीफोन पर बताया, मुझे जांच की जिम्मेदारी 13 अगस्त को मिली थी। एसआईटी जांच में एससी, एसटी, ओबीसी दशमोत्तर छात्रवृत्ति वितरण में भारी अनियमितताएं सामने आईं।

उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय के प्रवक्ता ने आईएएनएस से कहा, एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, टिहरी गढ़वाल जिलों में अलग-अलग स्थानों पर इस घोटाले के बाबत आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। आरोपियों की धरपकड़ के लिए एसआईटी ने राज्यभर में छापामारी शुरू कर दी है।

प्रवक्ता के मुताबिक, सरकारी धन की बड़ी लूट-खसोट के इस मामले में शामिल शिक्षण संस्थानों, बैंकों और कई संदिग्धों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। संदिग्धों में संस्थानों के संचालक, अधिकारी और लिपिक वर्गीय स्टाफ के साथ-साथ कुछ दलाल और बिचौलिया प्रवृत्ति के लोग भी शामिल हैं।

एसआईटी प्रमुख संजय गुंज्याल ने कहा, जिला ऊधमसिंह नगर में जसपुर, बाजपुर इलाके के छात्रों का भौतिक सत्यापन किया गया। छानबीन में पता चला कि छात्रों को इस गोरखधंधे के दलालों ने दूसरी योजना का लाभ दिलाने और पूर्व विद्यार्थियों को लाभ दिलाने के लिए उनसे शैक्षिक,जाति, स्थायी निवास प्रमाणपत्र इत्यादि प्राप्त करके जांच में फंसी शिक्षण संस्थाओं के साथ मिलकर मोटी रकम हड़प ली।

एसआईटी की ही जांच में सामने आया है कि राजकीय दस्तावेजों में आरक्षित श्रेणी/वर्ग के छात्रों की लाखों रुपये की छात्रवृत्तियां भी, धड़ल्ले से सामान्य वर्ग के छात्रों को बांटी हुई दिखा दी गईं। जबकि यह सरकारी धन सामान्य या आरक्षित वर्ग के किसी भी छात्र को दिया ही नहीं गया। लाखों रुपये की छात्रवृत्ति हड़पी गई है, इसकी पुष्टि तब हुई जब एसआईटी की टीमों को भागीरथ प्रयासों के बाद भी कोई ऐसा छात्र (सामान्य श्रेणी या फिर आरक्षित वर्ग) दस्तावेजों में दर्ज पते पर नहीं मिला, जिसे लाभार्थी दिखाया गया था।

इन्हीं तमाम अन्य खामियों की पुष्टि करते हुए एसआईटी प्रमुख संजय गुंज्याल ने आगे कहा, कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें कथित रूप से लाभार्थी विद्यार्थियों के फर्जी बैंक खाते उत्तर प्रदेश राज्य के परतापुर (मेरठ) में खोले दिखाए गए हैं। कथित तौर पर, इन छात्रों में से तमाम को यहीं के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों के रूप में दर्शाया गया है। इसमें संबंधित इंजीनियरिंग कॉलेज और कथित रूप से शामिल कुछ बैंकों पर भी जिम्मेदारी तय किया जाना लगभग तय है।

आईजी संजय गुंज्याल ने आईएएनएस को बताया, इस घोटाले में शामिल कई मुलजिमों के खिलाफ जसपुर-बाजपुर में भी मामले दर्ज किए गए हैं। इस मामले में हरियाणा के रेवाड़ी जिले के भी कुछ दलालों के नाम पता चले हैं। उनकी तलाश में भी छापामारी चल रही है।

उत्तराखंड राज्य पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, नैनीताल में एसआईटी द्वारा की गईजांच में सामने आया कि उत्तर प्रदेश के हापुड़ स्थित एक बदनाम निजी विश्वविद्यालय के जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय द्वारा 20 लाख 63 हजार 900 रुपये की छात्रवृत्ति के चेक भेजे गए थे। यह छात्रवृत्ति राशि 28 विद्यार्थियों की बताई गई है। एसआईटी जांच के मुताबिक, इस यूनिवर्सिटी में न कोई छात्र मिला न किसी को छात्रवृत्ति बांटे जाने का कोई दस्तावेज ही।

आईजी गुंज्याल ने कहा, राज्य के टिहरी गढ़वाल में थाना चम्बा स्थित एक फूड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में भी सरकारी बजट के गबन का मामला मिला है। इस सिलसिले में भी केस दर्ज करवाया गया है।

--आईएएनएस

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