बिहार : पटना में बारिश रुकने के बाद राहत और बचाव कार्य तेज

पटना, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। पटना में बारिश रुकने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली है। सरकार द्वारा राहत और बचाव कार्य भी तेज कर दिया गया है परंतु जलजमाव के कारण जो लोग अपने घरों में कैद हैं उनकी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। जो भी मदद की जा ही है वह नाकाफी साबित हो रही है। इस बीच भारी बारिश से अब तक 40 लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार का दावा है कि घरों में फंसे लोगों के लिए खाने के पैकेट पहुंचाए जा रहे हैं।

बिहार के आपदा प्रबंधन मंत्री लक्ष्मेश्वर राय ने मंगलवार को आईएएनएस को बताया, भारी बारिश के कारण पटना सहित राज्य के अन्य इलाकों में 40 लोगों की मौत हो गई है। राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की कुल 22 टीमें तैनात की गई हैं, जिसमें से छह टीमें पटना में लगाई गई हैं। भारतीय वायुसेना के दो हेलीकॉप्टर लोगों को खाने-पीने की चीजें पहुंचा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जलजमाव वाले क्षेत्रों में पानी कम हो रहा है। पटना में बाहर से मंगवाई गई मशीनों का इस्तेमाल कर पानी को निकालने का काम किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बुधवार तक स्थिति में बहुत सुधार हो जाएगा।

इस बीच सरकार के दावे के बाद भी स्थिति में बहुत सुधार नहीं है। पटना के राजेंद्रनगर और कंकड़बाग इलाकों में अभी भी पांच से छह फीट पानी जमा है। लोगों का कहना है कि भले ही सरकार दावा कर रही है, लेकिन स्थिति सुधरने में बहुत दिन लगेंगे।

इधर, राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राज्य सरकार की टीमें पीने का पानी और खाद्य सामग्री वितरित कर रही हैं और बिजली आपूर्ति ठीक करने का काम तेजी से किया जा रहा है।

पटना के जिलाधिकारी कुमार रवि ने बताया कि पटना के कई इलाकों में राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि टैंकरों से जलजमाव वाले क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जा रहा है।

इस बीच, नदियों के जलस्तर में वृद्घि लोगों को डरा रही है। बिहार के जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को गंगा नदी पटना में दीघाघाट, गांधी घाट, हाथीदह और मुंगेर, भागलपुर में खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। इस बीच सोन नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से गंगा के जलस्तर बढ़ने की संभवना व्यक्त की जा रही है।

सोन नदी के इंद्रपुरी बराज से मंगलवार की सुबह छह बजे जलस्राव जहां 2.47 क्यूसेक था वहीं आठ बजे यह बढ़कर 2.72 क्यूसेक हो गया था।

--आईएएनएस



Source : ians

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