अशोक तंवर ने मतदान के पन्द्रह दिन पहले कांग्रेस छोड़ी

एसपी मित्तल 
5 अक्टूबर को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे दिग्गज नेता अशोक तंवर ने कांग्रेस छोड़ दी है। हरियाणा विधानसभा के चुनाव 21 अक्टूबर को होने हैं। यानि मतदान से पन्द्रह दिन पहले कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। राहुल गांधी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर रहते हुए अशोक तंवर को हरियाणा का अध्यक्ष नियुक्त किया था। तंवर ने हरियाणा में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए बड़े आंदोलन भी किए।

तंवर ने पांच अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राहुल गांधी ने जिन नेताओं को आगे बढ़ाया अब उनका कांग्रेस में दम घुट रहा है। मेरे जैसे अनेक नेता हैं जिन्हें पार्टी में राहुल गांधी का संरक्षण मिला था, लेकिन अब ऐसे नेताओं को अपमानित किया जा रहा है। भाजपा के शासन में पांच वर्ष तक मेरे नेतृत्व में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने लम्बा संघर्ष किया।

कार्यकर्ताओं पर लाठी चार्ज भी हुआ। तंवर ने कहा कि लाठीचार्ज की वजह से मेरी बाईं आंख आज भी छोटी है। ऐसे अनेक कार्यकर्ता है जिन्हें शारीरिक नुकसान हुआ। इतना खून पसीना बहाने के बाद भी चुनाव के ऐन मौके पर कार्यकर्ताओं को अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे प्रदेश कांगे्रस के अध्यक्ष पद से हटाए जाने का अफसोस नहीं है, लेकिन जिस तरह से टिकिट बंटवारे में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई है उससे मुझे बेहद दु:ख है। अब मैं कांग्रेस में रह कर घुट घुट के मरना नहीं चाहता है, इसलिए कांग्रेस को छोड़ रहा हूं। उन्होंने कहा कि भाजपा तो कांग्रेस मुक्त भारत नहीं कर सकती है, लेकिन कांग्रेस के ही कुछ नेता कांग्रेस मुक्त भारत करने में लगे हुए हैं।

चूंकि अब आम कार्यकर्ता की संगठन में कोई सुनवाई नहीं हो रही है, इसलिए वे कांग्रेस छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग पांच वर्ष तक विदेशों में भ्रमण करते रहे, वे अब हरियाणा में आकर कांग्रेस की बागडोर संभाल रहे हैं। ऐसे नेता कितने बड़े हैं, इसका पता 24 अक्टूबर को परिणाम वाले दिन लग जाएगा। मुझे भाजपा का प्रस्ताव भी आया है, लेकिन मैं कार्यकर्ताओं से विचार विमर्श करने के बाद ही निर्णय लूंगा।
राहुल समर्थक बैचेन
हालांकि अपने इस्तीफे को चार पृष्ठों में तंवर ने लिखा है और अपने विचार व्यक्त कर दिए हैं। लेकिन अब देखा जा रहा है कि सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली कांग्रेस में राहुल गांधी के समर्थक बेचैन हैं। पांच अक्टूबर को जो बयान अशोक तंवर ने दिया वैसे ही बयान 4 अक्टूबर को मुम्बई कांग्रेस के अध्यक्ष रहे संजय निरुपम ने दिया था। संजय निरुपम का भी कहना रहा कि जिन लोगों को राहुल गांधी ने आगे बढ़ाया था उनकी अब उपेक्षा की जा रही है। कांग्रेस में अब ये माना जा रहा है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के समर्थकों के बीच ही संघर्ष हो रहा है।
सचिन पायलट पर भी नजर
राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट पर भी अब नजर लगी हुई है। पायलट भी कांग्रेस के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्हें राहुल गांधी ने आगे बढ़ाया था। पिछले दिनों ही पायलट ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि भाजपा के शासन में जिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने खून पसीना बहाया है उन्हें सरकार में सम्मान मिलना चाहिए। राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बने 9 माह हो गए हैं, लेकिन अब तक भी राजनीतिक नियुक्तियां नहीं हुई है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की हैसियत से पायलट इस मुद्दे को कई बार उठा चुके हैं, लेकिन अब भी तक भी कोई निर्णय नहीं हो पाया है। इस बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने पुत्र वैभव गहलोत को राजस्थान क्रिकेट एसोसएिशन का अध्यक्ष बनवाने में सफल रहे हैं। पायलट के समर्थक माने जाने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता रामेश्वर डूडी ने मुख्यमंत्री के पुत्र का खुलकर विरोध किया था। राजस्थान में भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के समर्थकों में खुले आम खींचतान हो रही है।

सीएम गहलोत को सोनिया गांधी का समर्थक माना जाता है। यह माना जा रहा है कि सोनिया गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद ही अशोक गहलोत स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत से सचिन पायलट सरकार को कुछ भी सीख हैं, लेकिन अशोक गहलोत वो ही कर रहे हैं जो उन्हें सरकार के हित में नजर आता है।

हाल ही में बसपा के छह विधायकों के कांग्रेस में शामिल करने को भी राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है। जिन बसपा विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने कांग्रेस का विधायक मान लिया उन बसपा विधायकों ने अभी तक भी कांग्रेस की सदस्यता ग्राहण नहीं की है। माना जा रहा है कि सचिन पायलट के विरोध के चलते प्रदेश कांग्रेस कमेटी में बसपा विधायकों की सदस्यता का समारोह नहीं हो पा रहा है।

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