मुहर्रम विशेष: आशूरा का रोज़ा एक साल के गुनाहों का कफ्फारा

मुरादाबाद। इस्लामिक वर्ष हिजरी के पहले महीने ‘मोहर्रम’ की मुस्लिम समुदाय में बहुत बड़ी उपलब्धि है। इस माह की दसवीं तारीख (आशूरा) का रोज़ा पिछले साल के गुनाहें को मिटा देता है। 
मस्जिद उम्मे आयशा के खादिम मौलाना अब्दुल गफ्फार ने बताया कि इसी दिन हजरत आदम अलै. को पैदा किया गया, इसी दिन उनको जन्नत से निकाला गया, इसी दिन उनकी तौबा कुबूल हुई, इसी दिन अर्श, कुर्सी, जीम, आसमा, चांद, सूरज और सितारे पैदा किए गए। इसी दिन हजरत इब्राहीम अलै. को पैदा किया गया। इसी दिन आपको गारेनमरूद से निजात मिली। हजरत इदरीस अलै. को इसी दिन आसमान पर उठाया गया। नूहअलेहिस्सलाम की कश्ती सूदी पहाड़ी पर इसी दिन ठहरी। सूलेमान अलेहिस्सलाम को इसी दिन बादशाहत मिली। यूनुस अलै. इसी दिन मछली के पेट से निकाले गए। 
इसी दिन आसमान से पहली बारिश हुई और इसी दिन अल्लाह तआला पूरी कायनात को वापस बुला लेगा।  कुरआन व हदीस के मुतालेअ से पता चलता है कि मोहर्रम की नवी-दसवीं या दसवी-ग्यारहवी तारीख को रोज़ा रखा जाए। बुखारी शरीफ में हजरत आयशा रजीअल्लाहताआला अन्हा की रिवायत है कि मौहम्मद सल्ललाहुअलेहीवसल्लम ने योमेय आशुरह के रोज़े रखने का हुक्म फरमाया है। 

जब से रमजान के रोजे फर्ज हुए तब हूजुर ने फरमाया कि इन रोजों को जिसका दिल चाहे रखे और जिसका दिल न चाहे वह न रखे। दूसरे यह कि दसवी तारीख को अपनी मालदारी के मुताबिक अपने अहलोअयाल पर खाने-पीने में खूब खर्च करें अल्लाह तआला पूरे साल उसके रिजक में खूब बरकत देता है। इस दिन जिक्र, दुआ व इस्तगफार और नफली इबादतों का ज्यादा से ज्यादा अहतमाम करें ताकि खुदा ताअला पूरे साल नेक काम और अच्छे आमाल करने की तौफीक अता फरमाता रहे। 

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