लिंचिंग भारतीय नहीं बल्कि RSS संस्कृति का हिस्साः बृंदा करात

नई दिल्ली। नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के मॉब लिंचिंग पर दिए गए बयान पर वाम दल ने पलटवार किया है। कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) नेता बृंदा करात ने संघ प्रमुख के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

नागपुर में संघ के स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में मोहन भागवत ने कहा था कि लिंचिंग विदेशी परिकल्पना है और कुछ लोग इस शब्द का इस्तेमाल करके भारत को बदनाम करना चाहते हैं।

इस संबंध में बृंदा करात ने कहा, अगर आरएसएस प्रमुख सही हैं तो भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सबसे ज्यादा बदनामी की है क्योंकि जुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने देश में हो रहीं मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर ध्यान दिया था। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को 8-10 निर्देश भी दिए थे, जिनमें से अब तक एक का भी पालन नहीं किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने आगे कहा, सुप्रीम कोर्ट लोकतंत्र पर खतरे की बात कर रहा है, इसका कहना है कि क्या यह लोकतंत्र है या फिर भीड़तंत्र और आज भागवत कह रहे हैं कि लिंचिंग भारत की संस्कृति का हिस्सा नहीं है। करात ने आगे कहा कि लिंचिंग "भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है बल्कि यह आरएसएस की संस्कृति का हिस्सा है और यही समस्या है।

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